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शिमला में वकीलों का चक्का जाम; PWD मंत्री विक्रमादित्य सिंह की गाड़ी का कटवाया चालान, जानें क्या है पूरा विवाद

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में सील्ड रोड विवाद को लेकर हाई कोर्ट के वकीलों ने चक्का जाम कर दिया। वकीलों ने पुलिस पर दबाव बनाकर PWD मंत्री विक्रमादित्य सिंह, SDM ओशिन शर्मा और एक DIG की गाड़ी का 1500 रुपये का चालान कटवा दिया। सीएम सुक्खू से बातचीत के बाद प्रदर्शन खत्म हुआ।

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सील्ड रोड विवाद में कटे चालान

Photo : Times Now Digital

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में 'सील्ड रोड' (प्रतिबंधित मार्गों) पर वाहनों की आवाजाही को लेकर प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच चल रहा गतिरोध मंगलवार को हिंसक प्रदर्शन और भारी हंगामे में बदल गया। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के बैनर तले सैकड़ों वकीलों ने छोटा शिमला से हाई कोर्ट सील्ड सड़क पर अपने वाहनों को रोके जाने के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान सचिवालय के बाहर वकीलों ने चक्का जाम कर दिया और पुलिस पर दबाव बनाकर सील्ड रोड से गुजर रही लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री विक्रमादित्य सिंह की सरकारी गाड़ी समेत कई बड़े प्रशासनिक अधिकारियों के वाहनों का नियमों के उल्लंघन के तहत 1500-1500 रुपये का चालान कटवा दिया।

गाड़ी में मौजूद थीं पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह

शिल्ली चौक के पास जब वकीलों ने चक्का जाम कर रखा था, उसी दौरान वहां से पीडब्ल्यूडी मंत्री विक्रमादित्य सिंह की सरकारी गाड़ी गुजरी। हालांकि, उस समय गाड़ी में मंत्री खुद मौजूद नहीं थे, लेकिन वाहन में उनकी माता और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह सवार थीं। मौके पर मौजूद अधिवक्ताओं ने वीआईपी गाड़ी को देखते ही उसे रुकवा लिया और पुलिस पर नियमों का समान रूप से पालन कराने का भारी दबाव बनाया। वकीलों के अड़ जाने के बाद पुलिस को आखिरकार प्रतिबंधित मार्ग पर नियम तोड़ने के आरोप में मंत्री की गाड़ी का 1500 रुपये का चालान काटना पड़ा।

SDM ओशिन शर्मा और DIG की गाड़ियां भी नहीं बचीं

वकीलों के गुस्से और हंगामे का शिकार केवल मंत्री की गाड़ी ही नहीं हुई, बल्कि सील्ड रोड से गुजर रही शिमला की एसडीएम (SDM) ओशिन शर्मा और एक डीआईजी (DIG) रैंक के बड़े पुलिस अधिकारी की गाड़ी को भी वकीलों ने रास्ते में ही जबरन रुकवा लिया। वकीलों ने साफ कहा कि जब नियम उनके लिए हैं, तो अधिकारियों के लिए अलग कानून क्यों? भारी ड्रामे और बहसबाजी के बाद वकीलों ने मौके पर ही एसडीएम ओशिन शर्मा और डीआईजी की गाड़ियों का भी नियम तोड़ने पर चालान करवा दिया। इस दौरान एसडीएम ओशिन शर्मा वकीलों को समझाती और बातचीत करती नजर आईं।

क्या है पूरा विवाद?

शिमला में सुरक्षा और पर्यावरण के लिहाज से कई मुख्य सड़कों को 'सील्ड रोड' घोषित किया गया है, जहां केवल आपातकालीन या विशेष परमिट वाले वाहनों को ही जाने की अनुमति होती है। वकीलों का कहना है कि वे वर्षों से छोटा शिमला सचिवालय मार्ग से होकर हाई कोर्ट तक बिना किसी रोक-टोक के आते-जाते रहे हैं। लेकिन अब पुलिस उन्हें इस सील्ड रोड पर रोककर 'कार्ट रोड' से जाने के लिए मजबूर कर रही है। कार्ट रोड पर पहले से ही भारी ट्रैफिक जाम रहता है, जिससे वकील समय पर अदालत नहीं पहुंच पा रहे हैं और न्यायिक कार्य प्रभावित हो रहा है। पहले सील्ड रोड के लिए चुनिंदा लोगों को 200 रुपये में पास मिल जाता था, लेकिन सरकार ने इस पास के शुल्क को बढ़ाकर सीधे 1500 रुपये कर दिया। इसके बाद नए आदेश जारी हुए कि अधिवक्ताओं को इस रोड पर एंट्री नहीं मिलेगी, जिसके बाद वकील सड़क पर उतर आए।

मुख्यमंत्री से वार्ता के बाद खत्म हुआ आंदोलन

सचिवालय के बाहर वकील इस बात पर अड़ गए थे कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू खुद बाहर आकर उनसे बात करें। स्थिति को बिगड़ता देख मुख्यमंत्री ने हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए बुलाया। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय कोचर ने बताया कि मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक बेहद सकारात्मक रही और इसके बाद फिलहाल प्रदर्शन को समाप्त कर दिया गया है। सरकार ने वकीलों को विशेष रियायती दरों पर 'सील्ड रोड परमिट' जारी करने पर सहमति जताई है। हालांकि, यह परमिट केवल उन्हीं वकीलों को जारी किए जाएंगे जिन्हें बार एसोसिएशन द्वारा प्रमाणित किया जाएगा। इसके अलावा इस विवाद के स्थायी समाधान के लिए प्रशासन ने एक विशेष समिति गठित करने का भी आश्वासन दिया है।

Poonam Sharma
पूनम शर्मा author

पूनम शर्मा ने एचपीयू से मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री की है, करीब 2 साल से टाइम्स नेटवर्क के लिए हिमाचल ब्यूरो के रूप में काम कर रही हैं, 2008 में इंडिया टीवी से विशेष संवाददाता के रूप में अपना करियर शुरू किया था, पूनम को राजनीति, खेल, व्यवसाय और सिनेमा की ताज़ा ख़बरें कवर करना पसंद है।

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