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JK Weather: जम्मू-कश्मीर में जमाने वाली सर्दी, लेकिन घाटी में नहीं हुई बर्फबारी; सूखी ठंड से जनजीवन बेहाल

जम्मू-कश्मीर में कड़ाके की सूखी ठंड पड़ रही है। तापमान भी शून्य से कई डिग्री नीचे बना हुआ है। सर्दी के कारण डल झील आंशिक रूप से जम गई है। लेकिन अब तक घाटी में बर्फबारी नहीं हुई। चिल्लई कलां का आधा समय बीतने के बावजूद मैदानी इलाकों में पहली बर्फबारी नहीं हुई। जिसके कारण जल संकट और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं।

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सांकेतिक फोटो (PTI)

Photo : PTI

JK Weather Today: जम्मू-कश्मीर में भीषण ठंड पड़ रही है। लेकिन मैदानी इलाकों में बर्फबारी नहीं हो रही है। रविवार को भी प्रदेश में सूखी ठंड का दौर जारी रहा। घाटी में रात का तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे बना रहा। साफ आसमान में सर्दियों की हल्की धूप के साथ सूरज निकला। पानी के नल और सड़क के गड्ढों में पानी पूरी तरह जम गया था, जबकि श्रीनगर शहर की डल झील भी कुछ हिस्सों में जम गई थी। सुबह लोग नलों के चारों ओर छोटी-छोटी आग जलाकर पानी को पिघलाते हुए देखे गए।

जम्मू-कश्मीर में कहां-कितना रहा तापमान

श्रीनगर में न्यूनतम तापमान माइनस 5.2 डिग्री सेल्सियस, गुलमर्ग स्की रिज़ॉर्ट में माइनस 6.2 और पहलगाम में माइनस 7.6 डिग्री सेल्सियस था। जम्मू शहर में न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस, कटरा शहर में 4.4, बटोटे में 3, बनिहाल में 7.1 और भद्रवाह में माइनस 2 डिग्री सेल्सियस रहा। जम्मू और कश्मीर, खासकर घाटी के लिए चिंताजनक स्थिति है, क्योंकि मौसम विभाग ने 20 जनवरी तक ठंडे, सूखे मौसम का अनुमान लगाया है। अधिकतम और न्यूनतम तापमान के बीच का अंतर भी कम हो गया है, क्योंकि शनिवार को श्रीनगर में अधिकतम तापमान 10.9 डिग्री सेल्सियस और जम्मू शहर में 15.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

चिल्लई कलां के दौर में भी बर्फबारी नहीं

वहीं, लगातार सूखे की वजह से पूरे केंद्र शासित प्रदेश में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि खेती, बागवानी और पीने के पानी की जरूरतें जिन सभी जल स्रोतों पर निर्भर हैं, वे 'चिल्लई कलां' कहे जाने वाले 40 दिनों की कड़ाके की ठंड के दौरान भारी बर्फबारी पर निर्भर करते हैं। यह अहम 40 दिनों का समय पहले ही आधे से ज़्यादा बीत चुका है, और घाटी के मैदानी इलाकों में इस मौसम की पहली बर्फबारी अभी तक नहीं हुई है। चिल्लई कलां 30 जनवरी को खत्म होता है। फरवरी और मार्च में होने वाली बर्फबारी का ज्यादा असर नहीं होता क्योंकि यह जल्दी पिघल जाती है और जम्मू-कश्मीर के पहाड़ों में बारहमासी पानी के जलाशयों को भरने में मदद नहीं करती।

डॉक्टरों का कहना है कि ठंडे, सूखे मौसम के कारण सीने और दिल से जुड़ी बीमारियां फिर से बढ़ रही हैं। सीने और दिल से जुड़ी बीमारियों का इतिहास रखने वाले लोगों को डॉक्टरों ने ज्यादा सावधानी बरतने की सलाह दी है, और ऐसे कमज़ोर लोगों को सलाह दी गई है कि वे कड़ाके की ठंड की लहर की स्थिति में अपने घरों से बाहर न निकलें।

(इनपुट -)

Pooja Kumari
पूजा कुमारीauthor

पूजा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज़्म में पीजी डिप्लोमा कर चुकी पूजा को टीवी मीडिया में भी काम करने का अनुभव है। शहरी मुद्दों की गहरी समझ के कारण पूजा लोकल न्यूज, मेट्रो व रेल अपडेट्स, रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर, लोकल डेवलपमेंट, मौसम, क्राइम, स्थानीय राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। शहरों की नब्ज पहचानने और स्थानीय संवेदनशीलताओं को खबरों में प्रभावी ढंग से पिरोने की क्षमता उनकी राइटिंग स्किल को विशेष बनाती है। पूजा अब तक 3,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट्स लिख चुकी हैं, जिनमें कई महत्वपूर्ण लोकल अपडेट्स, विश्लेषणात्मक स्टोरीज और रिपोर्ताज शामिल हैं।

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