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पहाड़ों-सुरंगों के बीच रोमांचक होगा सफर, इस साल पूरा होगा ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल मार्ग; यहां बनेंगे 12 स्टेशन

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ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना

Rishikesh-Karnprayag Railway Route Map: उत्तराखंड के पहाड़ों का सफर आसान बनाने के लिए कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें से ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का पहला चरण 2026 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। कर्णप्रयाग-सिमाई में परियोजना के तहत एक सुरंग बनाई जा रही है। सीएम धामी ने कर्णप्रयाग में कहा कि यह एक अनूठी परियोजना है। आप देख सकते हैं कि पहाड़ियों में सुरंग बनाना कितना मुश्किल है। हालांकि, काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। 2026 के अंत तक परियोजना का पहला चरण पूरा हो जाएगा।

पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा

सीएम ने कहा कि यह उत्तराखंड के विकास में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। धामी ने कहा कि रेल परियोजना पूरी हो जाने के बाद पहाड़ों की यात्रा आसान हो जाएगी और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इससे चारधाम की यात्रा बेहद सुविधाजनक हो जाएगी और रोजगार व स्वरोजगार के नये अवसर खुलेंगे। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल मार्ग की सौगात के जरिये प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के प्रति अपना विशेष प्रेम दिखाया है।

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना की लंबाई

परियोजना अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना की लंबाई 125 किलोमीटर है। इस खंड के तहत 16 सुरंगें और 12 स्टेशन बनाए जा रहे हैं। परियोजना का अधिकांश कार्य दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। कर्णप्रयाग का रेलवे स्टेशन सेवई में बनाया जा रहा है।

अधिकारियों ने बताया कि गौचर के भट्टनगर से सेवई तक 6.3 किलोमीटर लंबी ‘एस्केप टनल’ का निर्माण 25 दिसंबर को पूरा हो गया और 6.2 किलोमीटर लंबी मुख्य सुरंग का निर्माण इस वर्ष मार्च तक पूरा कर लिया जाएगा। अब मुख्य सुरंग पर केवल 695 मीटर काम बाकी है। परियोजना से जुड़े अधिकारियों ने कहा कि सेवई में परियोजना के तहत सड़क पुल और रेल पुल का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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