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'गवाहों ने नहीं पहचाना'...इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राजू पाल मर्डर केस के दोषी आबिद को दी जमानत

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि स्थानीय पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट के आधार पर जब गवाहों के बयान दर्ज किए गए, तब किसी भी प्रत्यक्षदर्शी ने आबिद को हमलावरों में शामिल व्यक्ति के रूप में नहीं पहचाना।

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सांकेतिक फोटो-Istock

प्रयागराज : बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के पूर्व विधायक राजू पाल हत्याकांड में दोषी करार दिए गए आरोपी आबिद को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने उसकी सजा पर फिलहाल रोक लगाते हुए अपील के अंतिम निस्तारण तक जमानत दे दी है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने कहा कि वर्ष 2024 से लंबित आपराधिक अपील पर निकट भविष्य में सुनवाई होने की संभावना नहीं है। ऐसे में अंतिम फैसला आने तक आरोपी को जमानत पर रिहा किया जा सकता है।

आबिद की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उसका नाम मूल एफआईआर में शामिल नहीं था। उसके खिलाफ कार्रवाई केवल सह-आरोपियों के बयानों के आधार पर शुरू की गई। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि मामले में कभी टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड (TIP) नहीं कराई गई और न ही उसके कब्जे से कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई।

    अदालत ने अपने आदेश में कहा कि स्थानीय पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट के आधार पर जब गवाहों के बयान दर्ज किए गए, तब किसी भी प्रत्यक्षदर्शी ने आबिद को हमलावरों में शामिल व्यक्ति के रूप में नहीं पहचाना। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि अभियोजन पक्ष जांच के दौरान किसी भी स्तर पर पहचान परेड कराने में विफल रहा।

    29 मई को पारित आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी का नाम एफआईआर में नहीं था और उसका नाम केवल सह-आरोपियों के बयानों के आधार पर सामने आया। इन परिस्थितियों को देखते हुए उसे अपील लंबित रहने तक जमानत का लाभ दिया जाना उचित है।

    गौरतलब है कि प्रयागराज पश्चिम विधानसभा सीट के उपचुनाव में अतीक अहमद के भाई अशरफ अहमद को हराने के बाद राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चलते 25 जनवरी 2005 को राजू पाल की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह मामला उत्तर प्रदेश के चर्चित राजनीतिक हत्याकांडों में शामिल रहा है।

    Pushpendra kumar
    पुष्पेंद्र कुमारauthor

    पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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