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इजराइल-ईरान युद्ध पर क्यों खामोश हैं PM मोदी? 'क्या US की खुशी के लिए भारतीय हितों का किया समझौता' : सिसोदिया

आम आदमी पार्टी के सीनियर लीडर सिसोदिया ने कहा कि अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध को कई दिन बीत गए, लेकिन भारत के प्रधानमंत्री के मुंह से एक शब्द तक नहीं निकला। यह चुप्पी सिर्फ़ चुप्पी नहीं है, बल्कि यह एक खतरनाक संकेत है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने पीएम को गुमराह किया या फिर पीएम ने अमेरिका को खुश रखने के लिए भारत के हितों से समझौता किया?

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आप नेता मनीष सिसौदिया (फोटो-@msisodia)

दिल्ली : अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को लेकर आम आदमी पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल खड़ा किया है। 'आप' के वरिष्ठ नेता और पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने कहा कि प्रधानमंत्री की यह चुप्पी भारत के लिए खतरनाक संकेत है। अमेरिका इस युद्ध की तैयारी कई महीने से कर रहा था। उसे पता था कि युद्ध शुरू होने के बाद तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। फिर भी अमेरिका ने ट्रेड डील के जरिए भारत को रूस से तेल नहीं लेने के लिए मना लिया। ऐसे में देशवासी जानना चाहते हैं कि क्या अमेरिका ने पीएम को गुमराह किया या फिर खुद पीएम ने अमेरिका को खुश रखने के लिए भारत के हितों से समझौता किया?

युद्ध के भारत पर क्या होंगे प्रभाव

'आप' पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने कहा कि आज एक भारतीय होने के नाते मन में कुछ बेहद गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ठीक एक महीने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के साथ एक ट्रेड डील करते हैं। उस डील में अमेरिका की एक अहम शर्त मान ली जाती है कि भारत रूस से तेल आयात नहीं करेगा। भारत अपनी ज़रूरत का ज्यादातर तेल खुद पैदा नहीं करता। सिसोदिया ने कहा कि हम रोज़ाना इस्तेमाल होने वाले तेल का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदते हैं। इसलिए किसी एक या दो स्रोत को बंद कर देना सिर्फ़ एक कूटनीतिक फैसला नहीं होता। यह सीधे इस बात से जुड़ा होता है कि देश में तेल की सप्लाई स्थिर रहेगी या नहीं, कीमतें नियंत्रित रहेंगी या नहीं और संकट के समय देश के पास विकल्प बचेंगे या नहीं। इसी को ऊर्जा सुरक्षा कहा जाता है।

मनीष सिसोदिया ने कहा कि इस फैसले के सिर्फ़ 20 दिन बाद अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू हो जाता है। खुद अमेरिका की सरकार कह रही है कि इस युद्ध की तैयारी कई महीनों से चल रही थी। मतलब उन्हें पहले से पता था कि युद्ध होने वाला है। उन्हें यह भी पता था कि इससे तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इसके बावजूद भारत से रूस का तेल छोड़ने का फैसला करवा लिया गया। अब देश के सामने सीधा सवाल है कि क्या अमेरिका ने भारत के प्रधानमंत्री को गुमराह किया या फिर, मोदी जी ने अमेरिका को खुश रखने के लिए खुद ही भारत के हितों को पीछे रख दिया?

युद्ध पर पीएम की चुप्पी खतरनाक-सिसोदिया

सिसोदिया ने कहा कि बात यहीं खत्म नहीं होती है। कल अमेरिका ने इस युद्ध को लगभग भारत के दरवाज़े तक ला खड़ा किया। 24 घंटे बीत गए, लेकिन भारत के प्रधानमंत्री के मुंह से एक शब्द तक नहीं निकला। यह चुप्पी सिर्फ़ चुप्पी नहीं है, बल्कि यह एक खतरनाक संकेत है। दुनिया में क्या संदेश जा रहा है कि भारत की सीमाओं के पास कोई भी आकर युद्ध कर सकता है और भारत का प्रधानमंत्री चुप बैठा रहेगा? यह सवाल उठना स्वाभाविक है। यह चुप्पी आखिर किसके हित में है?

मनीष सिसोदिया ने कहा कि भारत के बुलावे पर 'मिलन युद्धाभ्यास 2026' में शामिल होने के लिए ईरान ने अपना जहाज़ भेजा था। राष्ट्रपति जी के सामने उस जहाज़ की खूबियां बताई गई थीं। वही जहाज़ अमेरिका ने मार गिराया। 100 से ज्यादा लोग मारे गए। वे हमारे मेहमान थे। भारत के निमंत्रण पर आए थे, लेकिन भारत के प्रधानमंत्री खामोश हैं।

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