पटना

Bihar: हर्षित गिरोह के भंडाफोड़ के बाद EOU ने शुरू की पूरे रैकेट की पड़ताल, साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए चलाया जाएगा अभियान

Bihar: बिहार में हर्षित गिरोह का भांड़ाफोड़ करने और आरोपी की गिरफ्तारी के बाद उसके गैंग के अन्य सदस्यों की पड़ताल शुरू कर दी गई है। अब इस मामले में आर्थिक अपराध इकाई, सीबीआई और आईबी शामिल हो गई है।

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साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए चलाया जाएगा अभियान

Bihar: बिहार के बड़े साइबर अपराधियों में शुमार हर्षित कुमार को गिरफ्तार करने और उसके गिरोह का भंडाफोड़ करने के बाद आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने पूरे रैकेट की पड़ताल शुरू कर दी है। इस गिरोह में शामिल तमाम लोगों की पहचान कर इनके खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इन आरोपियों को दबोचने के लिए ईओयू द्वारा व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। हर्षित ने फर्जी दस्तावेज की बदौलत झारखंड में पाकुड़ के अलावा पश्चिम बंगाल और बिहार में कुछ स्थानों से सिम कार्ड खरीदे थे। अधिकारी ने बताया कि इन सिम कार्ड की संख्या 1 हजार से अधिक है। इन फर्जी सिम कार्ड को कैसे एक्टिवेट किया गया और इन्हें खरीदने में किन लोगों की सक्रिय भूमिका रही है, इन तमाम बातों की पड़ताल चल रही है। इसमें शामिल ऐसे सभी संदिग्धों की पहचान कर इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

सिम बॉक्स साइबर फ्रॉडइस

पूरे मामले की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि साइबर फर्जीवाड़ा करने के लिए इस तरह के सिम बॉक्स का इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा कुछ अन्य साइबर गैंग के स्तर पर भी सिम बॉक्स का इस्तेमाल करने की भी आशंका जताई जा रही है। ऐसे तमाम सरगनाओं की पहचान कर इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की तैयारी कर ली गई है। तमाम संदिग्ध स्थानों की रैंडम जांच की जाएगी। ताकि इन्हें दबोचा जा सके। साइबर फ्रॉड के पूरे गैंग को खंगालने की शुरुआत कर ली गई है। ताकि अधिक से अधिक अपराधियों को पकड़ा जा सके। इस गैंग में शामिल अन्य अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए कई स्थानों पर छापेमारी लगातार जारी है। संदिग्ध स्थानों की पहचान कर खासतौर से सघन तलाशी कराई जा रही है।

दूसरे देशों से जुड़े है इस साइबर ठगी के तार

साइबर ठगी के इस मामले में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके कई अन्य देशों से तार जुड़े हुए हैं। इनके बीच ठगी या फर्जीवाड़ा में जितनी राशि का लेनदेन हुआ है, उसका अधिकांश हिस्सा क्रिप्टो करेंसी में है। इनकी पूरी डिलिंग डार्क वेब के जरिए होती थी। हालांकि ईओयू ने हर्षित के एक बैंक खाते को सील कर दिया है, जिसमें ढाई करोड़ रुपये से अधिक हैं। ऐसे 35 से अधिक बैंक खातों की पहचान की गई है, जिनमें हुए करोड़ों के लेनदेन की पूरी जानकारी एकत्र की जा रही है।

ईओयू के साथ सीबीआई और आईबी करेंगी मामले की जांच

इस मामले में ईओयू के साथ सघन तफ्तीश करने के लिए सीबीआई की आर्थिक अपराध इकाई और आईबी (इंटेलिजेंस ब्यूरो) की खास टीम के कुछ अधिकारी मंगलवार को पटना पहुंच गए हैं। कुछ अन्य अधिकारियों के भी जल्द पहुंचने की संभावना है, ताकि पूरे मामले की सही तरीके से तफ्तीश की जा सके। इस गैंग के तार कई राज्यों के अतिरिक्त विदेशों तक से जुड़े होने के कारण केंद्रीय जांच एजेंसियों को भी जांच में शामिल किया जा रहा है, जिससे मामले की तफ्तीश में सुविधा हो और दूसरे राज्यों में भी तेजी से कार्रवाई कर संबंधित अपराधियों को दबोचा जा सके। इस मामले में ईओयू के एडीजी नैयर हसनैन खान का कहना है कि ईओयू में पूरे मामले की तफ्तीश के लिए व्यापक स्तर पर तैयारी की गई है। साइबर फ्रॉड से जुड़े तमाम जालसाजों की तलाश की जा रही है। पूरे मामले की व्यापक स्तर पर जांच जारी है। जल्द इस मामले में कई संदिग्धों की गिरफ्तारी हो सकती है। इससे फायदा उठाने वाले सभी लोगों की भी पड़ताल चल रही है।

Varsha Kushwaha
वर्षा कुशवाहाauthor

वर्षा कुशवाहा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की एजुकेशन डेस्क पर बतौर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं और पिछले 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा पूरा करने के बाद उन्होंने न्यूज रूम में तेजी, सटीकता और गहराई के साथ काम करते हुए अपनी मजबूत संपादकीय पहचान बनाई है। वर्षा की विशेषज्ञता हाइपर-लोकल खबरों, इवेंट कवरेज और स्टेट पॉलिटिक्स से जुड़ी रिपोर्टिंग में भी है। अब तक वर्षा कुशवाहा 8,000 से अधिक खबरें लिख चुकी हैं, जिनमें कई अहम लोकल रिपोर्ट्स, एजुकेशन और करियर की खबरें तथा फीचर-आधारित स्टोरीज शामिल हैं।

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