पटना

Mann Ki Baat: प्रेरक कहानियांं करती हैं देशवासियों को प्रेरित, मन की बात कार्यक्रम के बाद बोले अश्विनी चौबे

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 30, 2023, 01:05 PM IST

Mann Ki Baat: केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने कहा, ​​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम की 100वीं कड़ी में प्रेरणादायी संबोधन में बहुत संवेदनशील और आवश्यक विषयों पर देशवासियों से चर्चा की।

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मन की बात कार्यक्रम को सुनते केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे

Mann Ki Baat: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम के 100वें संस्करण का प्रसारण बक्सर संसदीय क्षेत्र के ब्रह्मपुर विधानसभा में भी हुआ। इस दौरान केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने बूथ संख्या 273 पर पार्टी कार्यकर्ताओं व जनमानस के साथ इस कार्यक्रम को सुना। उन्होंने कहा,

मन की बात की प्रेरक कहानियां देशवासियों को प्रेरित करती हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम की 100वीं कड़ी में प्रेरणादायी संबोधन में बहुत संवेदनशील और आवश्यक विषयों पर देशवासियों से चर्चा की। निश्चित तौर पर यह कार्यक्रम उत्साह, प्रेरणा,कर्तव्यबोध और भारत बोध की भावना को जागृत करने वाला है।

देश के हर कोने से लोग इस कार्यक्रम से जुड़े

केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने कहा, पीएम मोदी के मन की बात कार्यक्रम की शुरुआत अक्टूबर 2014 में विजयादशमी के शुभ अवसर शुरु हुई थी। तब से से लेकर आज तक इसका हर संस्करण अपने आप में विशेष रहा है। पूरे देश से, हर कोने से, हर आयु के लोग मन की बात से जुड़े है। इसके माध्यम से बेटी बचाओ - बेटी पढ़ाओ, स्वच्छ भारत आंदोलन, खादी के प्रति प्रेम, प्रकृति की बात, आज़ादी का अमृत महोत्सव, अमृत सरोवर ऐसे कई विषयों पर प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि मन की बात जिस विषय से जुड़ा वो जन आंदोलन बन गया है। हर संस्करण के तरह यह संस्करण भी अपने आप में विशेष और प्रेरणादायी रहा। देश मे बड़ी संख्या में लोग जुड़े। मन की बात-जन जन की बात हो गई है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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