प्रयागराज में हो रहे महाकुंभ में हर दिन करोड़ो लोग स्नान कर रहे हैं। यहां हर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पहुंच रही है। बढ़ती भीड़ को देखते हुए कई स्पेशल ट्रेनों का भी संचालन किया जा रहा है, लेकिन फिर भी भीड़ कम होने का नाम ही नहीं ले रही है। ऐसे ही एक नजारा बिहार के मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन पर देखने को मिला। यहां प्लेटफार्म नंबर दो पर प्रयागराज जाने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। ट्रेन का गेट बंद होने के कारण महिला यात्रियों को खिड़की से ट्रेन में जाते हुए देखा गया। यहां लोग जान जोखिम में डालकर यात्रा कर रहे हैं।
रेलवे स्टेशन पर बेकाबू हुई भीड़
प्रयागराज महाकुम्भ में जाने के लिए मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन पर लगातार भीड़ बढ़ती जा रही है। प्रयागराज जाने वाली ट्रेनों में चढ़ने के लिए बेकाबू भीड़ जंक्शन पर उमड़ पड़ी और यात्री खिड़कियों से अंदर जाने लगे। यहां स्टेशन के साथ ट्रेनों में भी पैर रखने की जगह नहीं है। ट्रेने खचाखच भरी पड़ी है। पवन एक्सप्रेस ट्रेन में चढ़ने के लिए यात्री धक्का मुक्की करते हुए नजर आए हैं। ट्रेन के प्लेस होते ही गेट पूरी तरह से जाम हो गया।
कंफर्म टिकट होते हुए भी यात्रा नहीं कर पाए यात्री
दरअसल, मुजफ्फरपुर जंक्शन पर पहुचने से पहले पवन एक्सप्रेस भरी हुई थी। ट्रेन के रुकते ही प्लेटफॉर्म पर खड़े यात्री ट्रेन में चढ़ने के लिए टूट पड़े। महिला यात्री जब ट्रेन के अंदर प्रवेश नही कर पाई तो खिडकी से अंदर प्रवेश करने लगी। वही पुरुष यात्री गेट पर धक्का दे देकर अंदर घुसे। बता दें कि महाकुंभ जाने के लिए जंक्शन पर अफरातफरी की स्थिति बनी रही। स्लीपर, एसी बोगियों में भी यात्रियों की खचाखच भीड़ देखने को मिली। इस बीच भीड़ अधिक होने के कारण दर्जनों यात्री हाथ में कंफर्म टिकट लेकर प्लेटफॉर्म पर खड़े रह गए ट्रेन में जगह नहीं होने के कारण कई यात्री चढ़ नहीं पाए। कई यात्री पायदान पर लटककर जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर दिखे।
भीड़ अधिक होने के कारण आरपीएफ माइक से लोगों को अफरातफरी मचाने से रोकते हुए नजर आए। प्रयागराज जाने वाली गोंदिया एक्सप्रेस में भी भारी भीड़ देखे को मिली। आम आदमी को ट्रेन में चढ़ने और उतारने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस बीच महाकुंभ जा रहे यात्रियों ने बताया कि ट्रेन में पैर रखने तक कि जगह नही है। भीड़ इतनी है कि सास लेने में भी परेशानी हो रही है। लोग फर्स पर बैठकर यात्रा करने को मजबूर हैं।
