पटना

पटना की खास सड़क खुलने को तैयार! चार लेयर में फर्राटा भरेंगे वाहन; जानिए डबल डेकर की खासियत

बिहार की राजधानी पटना में गांधी मैदान स्थित कारगिल चौक से लेकर पटना साइंस कॉलेज तक, अशोक राजपथ पर एक शानदार डबल डेकर एलिवेटेड रोड बन रहा है। इस 2.2 किमी लंबा प्रोजेक्ट शहर की यातायात व्यवस्था में एक नई जान डालने वाला है।

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double decker elevated road in patna

पटना शहर में यातायात को लेकर सरकार नए कदम उठा रही है। शहर में फ्लाईओवर, मेट्रो समेत कई अन्य व्यवस्थाएं की जा रही हैं।अब अनोखा ट्रांसपोर्ट सिस्टम विकसित होने से पांच अलग-अलग लेवल पर सफर संभव होगा। जानकारी के मुताबिक, सबसे नीचे अंडरग्राउंड मेट्रो दौड़ेगी तो उसके ऊपरी सतह पर गाड़ियों की आवाजाही होगी। उसके ऊपर डबल डेकर पुल, जिसमें दो तल्लों वाली सड़कें शामिल होंगी, जिससे कम जगह पर ट्रैफिक व्यवस्था आसान होगी और लोग कम समय में अपने गंतव्य की ओर जा सकेंगे।

रूट मैप

उपरी तल पर चलने वाले वाहनों की कनेक्टिविटी पीएमसीएच के मल्टीलेवल पार्किंग में दी गई है। कारगिल चौक से एनआइटी के बीच बीएन कॉलेज, पीएमसीएच, खुदा बख्श लाइब्रेरी, पटना कॉलेज, साइंस कॉलेज के अलावा, निजी अस्पताल और कोचिंग संस्थानों के साथ घना बस्ती है।

डबल डेकर पुल का निर्माण पूरा

अशोक राजपथ पर डबल डेकर पुल का निर्माण अंतिम चरण में है। पुल की लंबाई 2.2 किमी है और इसमें 65 पिलर का निर्माण हुआ है। डबल डेकर पुल की शुरुआत करगिल चौक से होगी। पहला तल 1.5 किमी लंबा होगा, जबकि दूसरा तल 2.2 किमी होगा। पुल का निर्माण 422 करोड़ की लागत से किया जा रहा है। जो पटना के भीड़-भाड़ वाले इलाकों में यातायात को सुगम बनाएगा। पटना में डबल डेकर फ्लाईओवर का निर्माण कार्य सितंबर 2021 में शुरू हुआ था। इसका शिलान्यास मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 4 सितंबर 2021 को किया था। अब फिनिशिंग का काम चल रहा है। उम्मीद लगाई जा रही है कि इसका उद्घाटन इसी महीने के आखिरी में किया जायेगा।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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