पटना

बिहार में हैवानियत की हद पार, आदमी ने कुत्ते को बनाया हवस का शिकार

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 20, 2023, 10:21 AM IST

बिहार में कुत्ते के साथ रेप करते हुए व्यक्ति का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। पुलिस व्यक्ति की पहचान करने में जुटी हुई है।

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बिहार में आदमी ने कुत्ते को बनाया हवस का शिकार (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Photo : iStock

Bihar News: बिहार के पटना से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। आए दिन दुष्कर्म, हत्या और लूट की घटनाएं तो आम सी हो गई हैं, लेकिन ताजा मामले में एक इंसान ने कुत्ते को ही अपनी हवस का शिकार बनाया। इस पूरी घटना का वीडियो भी वायरल कर दिया है। मामला सामने आते ही पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस आरोपी की तलाश कर रही है।

आठ मार्च की है घटना

घटना आठ मार्च होली के दिन की है, जिसका वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें व्यक्ति खुले तौर पर कुत्ते के साथ दुष्कर्म करता हुआ नजर आ रहा है। जानकारी के मुताबिक, यह घटना फुलवारीशरीफ इलाके के फैसल कॉलोनी की है। वीडियो सामने आने के बाद पशुओं के अधिकारों के लिए काम करने वाले एनजीओ निधि भूरी फाउंडेशन की ओर से इस मामले में फुलवारीशरीफ थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है। पुलिस ने व्यक्ति के खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में अभी तक आरोपी की पहचान नहीं हो पाई है।

पहले भी कई घटनाएं आ चुकी हैं सामने

बिहार के लिए इस तरह का यह भले ही नया मामला हो, लेकिन कई राज्यों से कुत्ते या अन्य जानवरों के साथ इस तरह के अप्राकृतिक कृत्य के मामले सामने आते रहे हैं। इसके पहले दिल्ली, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में इस तरह की घटना सामने आई थी, जहां अलग-अलग व्यक्तियों ने कुत्तों को अपनी हवस का शिकार बनाया था। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में ऐसा मामला सामने आया था, जहां 60 साल के एक बुजुर्ग ने कुत्ते के साथ हैवानियत की थी। इसके बाद उसकी बहू ने उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दिया था।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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