Mansa Murder Case: मानसा में एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परमिंदर सिंह झोटा की दिनदहाड़े हत्या के बाद पंजाब में राजनीति गरमा गई है। बीजेपी, शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस के नेताओं ने इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार पर जमकर निशाना साधा है। विपक्षी नेताओं ने राज्य की कानून-व्यवस्था और नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोग भी सुरक्षित नहीं हैं।
अकाली दल के वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने सवाल उठाते हुए कहा कि झोटा करीब चार साल से नशे के खिलाफ अभियान चला रहे थे। वह मेडिकल स्टोरों पर बेची जाने वाली नशीली गोलियों के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। चीमा के मुताबिक, झोटा के खिलाफ ही मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया था। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने फिर से नशे के खिलाफ अपना अभियान शुरू किया। चीमा ने पंजाब सरकार के नशा विरोधी अभियान पर सवाल उठाते हुए कहा, “यही है पंजाब सरकार का युद्ध नशे के विरुद्ध।”
हरसिमरत कौर बादल ने भगवंत मान सरकार पर साधा निशाना
शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पंजाब में नशा विरोधी कार्यकर्ताओं, कारोबारियों, सहायक उपनिरीक्षकों और आम नागरिकों की दिनदहाड़े हत्या की जा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने राज्य को नशा माफिया और आपराधिक गिरोहों के हवाले कर दिया है। हरसिमरत ने कहा कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों को या तो प्रशासन की ओर से दबाया जा रहा है या उनकी हत्या की जा रही है। उन्होंने कहा, "कोई भी PR स्टंट आपके हाथों पर लगे खून को छिपा नहीं सकता।"
सुखबीर बादल ने नशा विरोधी अभियान पर उठाए सवाल
शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने परमिंदर सिंह झोटा की हत्या पर दुख जताते हुए उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि झोटा लगातार नशे के खिलाफ आवाज उठा रहे थे, लेकिन उन्हें न तो पर्याप्त समर्थन मिला और न ही उनकी शिकायतों पर ध्यान दिया गया। सुखबीर बादल ने भगवंत मान सरकार के ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान को दिखावा बताते हुए कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। उन्होंने सरकार पर जनता की समस्याओं से ध्यान हटाने और प्रशासनिक जिम्मेदारियों में विफल रहने का आरोप भी लगाया। अकाली दल के नेता केवल सिंह ढिल्लों ने भी पंजाब में अपराध और नशे की समस्या को लेकर सरकार की आलोचना की और मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग की।
कांग्रेस ने भी सरकार की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने परमिंदर सिंह झोटा की दिनदहाड़े हत्या राज्य में कानून-व्यवस्था और सरकार के नशा विरोधी अभियान की विफलता को दर्शाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि झोटा ने पंजाब में नशे की समस्या के खिलाफ आवाज उठाई, लेकिन सरकार ने उनकी पहल को जरूरी समर्थन नहीं दिया। वड़िंग ने झोटा के परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए बताया कि 2023 में झोटा पर मामला दर्ज होने और उनकी गिरफ्तारी के समय वह उनके पिता और परिवार से मिले थे। उन्होंने कहा कि इस घटना ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
रवनीत सिंह बिट्टू ने भी कानून-व्यवस्था पर साधा निशाना
वहीं, भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने ने भी हत्या को लेकर पंजाब सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि जब नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोग और आम नागरिक सुरक्षित नहीं हैं, तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान के पास गृह विभाग होने का जिक्र करते हुए राज्य में कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए।
मेडिकल स्टोर पर विवाद के बाद हुई थी हत्या
जानकारी के अनुसार, परमिंदर सिंह झोटा मंगलवार को एक व्यक्ति के साथ मानसा के मेडिकल स्टोर पर पहुंचे थे। बताया गया कि उस व्यक्ति ने कथित तौर पर उस दुकान से नशीली दवाएं खरीदी थीं। झोटा दुकानदार से दवाओं की बिक्री को लेकर सवाल कर रहे थे और मोबाइल फोन से बातचीत को रिकॉर्ड कर रहे थे। इसी दौरान बहस बढ़ गई। आरोप है कि मेडिकल स्टोर पर मौजूद व्यक्ति ने पिस्तौल निकालकर झोटा पर फायरिंग कर दीं। जिससे उनकी मौत हो गई। घटना में दो अन्य लोग भी गोली लगने से घायल हुए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। मानसा के एसएसपी वैभव चौधरी ने आरोपियों को 24 घंटे के भीतर पकड़ने की बात कही है।
