नोएडा

नोएडा में साइबर अपराधियों का आतंक! बुजुर्ग दंपति को 'डिजिटल अरेस्ट' कर ठगे 3 करोड़ 14 लाख रुपये

उत्तर प्रदेश के नोएडा में साइबर अपराधियों का आतंक देखने को मिला है। जहां एक बुजुर्ग दंपति को ‘डिजिटल अरेस्ट' कर 3 करोड़ 14 लाख रुपये की ठगी की गई। ठगों ने खुद को TRAI, पुलिस, CBI और सुप्रीम कोर्ट के अधिकारी के तौर पर पेश किया। बुजुर्ग को डराया और उनपर मानसिक दबाव बनाकर उनसे सारी जमा पूंजी ठग ली।

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नोएडा में साइबर ठगी।

Photo : iStock

Noida: साइबर अपराधियों ने एक बार फिर करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दिया है, मामला उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले के नोएडा सेक्टर-75 का है। जहां एक बुजुर्ग दंपति को करीब 15 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर कुल 3.14 करोड़ रुपये ठगने का मामला सामने आया है। इसकी जानकारी पुलिस ने साझा की है। पुलिस ने बताया कि बुजुर्ग बिरज कुमार सरकार निजी बैंक के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं।

बुजुर्ग ने साइबर थाने में दर्ज कराई शिकायत

पुलिस उपायुक्त (साइबर अपराध) प्रीति यादव ने बताया कि ठग ने मुंबई के कोलाबा थाना का अधिकारी बन दंपति को गिरफ्तार करने की धमकी दी और बचने के लिए बताए गए खातों में पैसे डालने को कहा। उन्होंने बताया कि बुजुर्ग ने बृहस्पतिवार को साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई।

अपराधियों ने कैसे इस वारदात को दिया अंजाम?

प्रीति यादव ने बताया कि बुजुर्ग ने शिकायत की कि 25 फरवरी को ट्राई (TRAI) के नाम पर एक व्यक्ति ने उनको फोन किया और पुराने नंबर की जानकारी मांगी। नंबर देने पर फोन करने वाले ने बताया कि उक्त नंबर के तार ‘नरेश गोयल धनशोधन’ मामले से जुड़े हैं और बुजुर्ग के खिलाफ कोलाबा पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

सीबीआई अधिकारी बनकर ठग ने किया संपर्क

बुजुर्ग को डराने के लिए थोड़ी ही देर बाद ये बताया गया कि मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और निवेश धोखाधड़ी से जुड़ी शिकायत दर्ज है। इसके तुरंत बाद कोलाबा पुलिस स्टेशन के एक कथित अधिकारी विजय खन्ना और एक सीबीआई अधिकारी राहुल गुप्ता ने बुजुर्ग से संपर्क किया। अधिकारी के वेश में इन साइबर अपराधियों ने बुजुर्ग को बताया कि उन्हें भारत के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष ऑनलाइन पेश किया जाएगा। ठगों ने बुजुर्ग को भरोसा दिलाया कि यह मामला नरेश गोयल के मनी लॉन्ड्रिंग केस से जुड़ा है और उनके बैंक खातों को फ्रीज कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं अपराधियों ने बुजुर्ग को राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दिया और ये तक धमकी दे दी कि यदि वो इस बात को किसी से साझा भी करते हैं तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

बुजुर्ग को डरा धमका कर ट्रांसफर कराए 3.14 करोड़ रुपये

पुलिस अधिकारी ने बताया कि साइबर अपराधियों ने शिकायतकर्ता की बात थाने के कथित अधिकारी से कराई जिसने उन्हें पेश होने को कहा और मना करने पर ऑनलाइन प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात की। उन्होंने बताया कि दंपति से ठगों आईपीएस अधिकारी, सीबीआई अधिकारी बनकर बात की और डरा धमका कर 3 करोड़ 14 लाख रुपये कई बैंक खातों में ट्रांसफर कराया।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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