नोएडा

नोएडा के डंपिंग ग्राउंड में लगी भीषण आग, बुझाने की कोशिश में जुटीं दमकल की 15 गाड़ियां

Huge Fire in Noida's Dumping Ground: नोएडा के डंपिंग ग्राउंड में भीषण आग लग गई है। आग को बुझाने के लिए मेगा एक्शन जारी है। घटना की सूचना मिलते ही दमकल की करीब 15 गाड़ियां मौके पर पहुंची और आग बुझाने की कोशिश में जुट गई हैं। आपको इससे जुड़ी हर जानकारी आप रिपोर्ट में पढ़िए।

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File Photo

Noida: नोएडा के सेक्टर 32 में बने हॉर्टिकल्चर के डंपिंग ग्राउंड में लगी आग से आसपास के लोगों का हाल बेहाल है। धुएं के कारण आसपास की सोसाइटी में रहने वालों की हालत खराब है। सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड की करीब 15 गाड़ियों और 75 कर्मचारी लगातार आग पर काबू पाने की कोशिश में जुटे हुए हैं। यह हॉर्टिकल्चर का वह डंपिंग ग्राउंड है, जहां पर सूखी पत्तियों और कूड़ा फेंका जाता है। इसका एरिया तकरीबन दो किलोमीटर से ज्यादा का है। तेज हवा के चलने के कारण आग पर काबू पाने में फायर कर्मचारि‍यों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

फायर ब्रिगेड की 15 गाड़ियां आग बुझाने की कोशिश में जुटी

गौतमबुद्ध नगर के चीफ फायर ऑफिसर प्रदीप चौबे ने बताया कि जैसे ही आग लगने की सूचना मिली, मौके पर फायर ब्रिगेड की 15 गाड़ियों को तुरंत रवाना कर दिया गया। आग सूखी पत्तियों के 30 से 40 फुट के ढेर में लगी हुई है और तेज हवा के कारण इस पर काबू पाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने बताया कि दो किलोमीटर से ज्यादा का यह एरिया है, इसीलिए चारों तरफ से आग पर काबू पाने की कोशिश की जा रही है। आग बुझाने के लिए पास ही बने मॉल और अन्य जल स्रोतों से पानी का इस्तेमाल किया जा रहा है।

गौरतलब है कि बीते वर्ष भी इसी जगह पर आग लगी थी, जिस पर लगभग सात दिनों में काबू पाया जा सका था। इस आग के कारण सबसे ज्यादा दिक्कत आसपास के रिहायशी इलाकों में रहने वालों को हो रही है, जिन्हें यहां से निकलने वाले धुएं के कारण दमघोंटू हवा का सामना करना पड़ रहा है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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