भोपाल : भोज वेटलैंड के तहत आने वाली भोपाल की प्रसिद्ध छोटी झील (लोअर लेक) को बचाने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने झील के आसपास हो रहे अवैध निर्माण, गंदे पानी (सीवेज) के बहाव और पेड़ों को नुकसान पहुँचाए जाने के मामलों में गंभीरता दिखाते हुए संबंधित विभागों को चार सप्ताह के भीतर अपनी कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
मामले की मुख्य बातें:
याचिका में प्रतिबंधित क्षेत्र में बिना अनुमति निर्माण का मुद्दा उठाया गया। नगर निगम का तर्क था कि यह केवल मरम्मत का काम है, लेकिन एनजीटी ने साफ कर दिया कि प्रतिबंधित क्षेत्र में किसी भी तरह के अवैध या अनधिकृत निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके साथ ही 'वेटलैंड नियम, 2017 का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
सीवेज प्रदूषण पर लगाम
झील में सीधे मिल रहे गंदे पानी को रोकने के लिए नगर निगम और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को निर्देश दिए गए हैं। निगम ने बताया कि अमृत 2.0 योजना के तहत नालों के डायवर्जन का काम चल रहा है, जिसकी प्रगति रिपोर्ट भी चार सप्ताह में मांगी गई है।
पेड़ों को नुकसान पहुंचाने पर नाराजगी
पेड़ों को कथित तौर पर जहरीले रसायन देकर सुखाने और नुकसान पहुंचाने के मामलों में वन विभाग, नगर निगम और ट्री ऑफिसर द्वारा रिपोर्ट न पेश करने पर पीठ ने कड़ी नाराजगी जताई है। अब पेड़ों को हुए नुकसान, उनकी कटाई और नए पौधे लगाने (प्रतिपूरक वनीकरण) को लेकर भी जवाब मांगा गया है।
क्यों जरूरी है यह कार्रवाई?
भोज वेटलैंड एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का रामसर स्थल (Ramsar Site) है। इसलिए लोअर लेक की प्राकृतिक खूबसूरती, पानी की शुद्धता और पर्यावरण की रक्षा करना बेहद जरूरी है। इस मामले की अगली सुनवाई 21 दिसंबर 2026 को तय की गई है, और तब तक सभी संबंधित विभागों को अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी।
