मुंबई

शिवाजी के 12 किलों को मिला UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज का दर्जा, राज ठाकरे ने कह दी बड़ी बात

शिवाजी किलों की यूनेस्को सूची में शामिल होने पर राज ठाकरे ने खुशी जताई। राज ठाकरे ने छत्रपति शिवाजी महाराज के 12 किलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल करने का स्वागत किया और सरकार से इन किलों के संरक्षण के प्रति अधिक ध्यान देने की मांग की।

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(फाइल फोटो, इमेज क्रेडिट-musafir.com)

मुंबई : महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने शनिवार को छत्रपति शिवाजी महाराज के 12 किलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल करने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इन ऐतिहासिक संरचनाओं पर सभी अनधिकृत निर्माणों को हटाना चाहिए, चाहे वे किसी भी समुदाय से संबंधित हों। ठाकरे ने चेतावनी दी कि सरकार को विश्व धरोहर के दर्जे को हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि मानदंडों का पालन न करने पर यह दर्जा खोया जा सकता है।

इन किलों को मिला सम्मान

‘मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स’ के तहत शामिल किलों में महाराष्ट्र के साल्हेर, शिवनेरी, लोहगढ़, खंडेरी, रायगढ़, राजगढ़, प्रतापगढ़, स्वर्णदुर्ग, पन्हाला, विजय दुर्ग, सिंधुदुर्ग और तमिलनाडु का जिंजी किला शामिल हैं। ठाकरे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि सरकार को इन किलों पर सभी अनधिकृत निर्माणों को तुरंत ध्वस्त करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यह अवसर महाराष्ट्र की उपलब्धियों को उजागर करने का है और यह दर्शाता है कि शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित स्वराज्य का विचार कितना व्यापक था।

उन्होंने उम्मीद जताई कि अब इन किलों का उचित संरक्षण होगा और राज्य सरकार को इनके संरक्षण के लिए धन आवंटित करना चाहिए। ठाकरे ने यह भी कहा कि अतीत में सरकारों ने इन किलों को जर्जर छोड़ दिया था, जिससे शिवाजी महाराज और महाराष्ट्र के वैभव को दुनिया के सामने लाना मुश्किल हो गया था।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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