मुंबई

क्या सैफ अली खान पर हमले के आरोपी को मिलेगी जमानत? मुंबई पुलिस ने किया शरीफुल इस्लाम की याचिका का किया विरोध

Saif Ali Khan Attack Case: सैफ अली खान हमला मामले से जुड़ा नया अपडेट सामने आया है। मुंबई पुलिस ने आरोपी शरीफुल इस्लाम की जमानत याचिका का विरोध किया। इससे पहले मंगलवार को बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान पर हुए हमले के मामले में पुलिस ने बांद्रा कोर्ट में चार्जशीट दायर की थी।

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सैफ अली खान पर हुए हमले के मामले में आया नया अपडेट।

बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान पर हमला करने के मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपी मोहम्मद शरीफुल इस्लाम शहजाद ने मुंबई के सेशन कोर्ट में जमानत के लिए याचिका दाखिल की है। हालांकि, मुंबई पुलिस ने आरोपी की जमानत याचिका का विरोध किया है। इस मामले में अगली सुनवाई 17 अप्रैल को होगी।

आरोपी की जमानत याचिका मामले में मुंबई पुलिस का जवाब

मुंबई पुलिस ने आरोपी की तरफ से दाखिल की गई जमानत याचिका मामले में अपना जवाब कोर्ट में दाखिल किया। उन्होंने कहा कि जिस चाकू से सैफ अली खान पर हमला किया गया था, फोरेंसिक जांच में चाकू के तीनों टुकड़े मेल खाते पाए गए हैं।

पुलिस का कहना है कि यह आरोपी के खिलाफ महत्वपूर्ण सबूत है। अगर आरोपी को जमानत दी गई तो उसके फरार होने की संभावना है, इसलिए शरीफुल की जमानत अर्जी मंजूर न की जाए। बता दें कि आरोपी शरीफुल ने अपनी जमानत याचिका में दावा किया कि उसे झूठे मामले में फंसाया गया है और पुलिस के पास कोई मजबूत सबूत नहीं है। इतना ही नहीं, एफआईआर में कई खामियां भी हैं।

इस मामले में पुलिस ने बांद्रा कोर्ट में दायर की थी चार्जशीट

इससे पहले मंगलवार को बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान पर हुए हमले के मामले में पुलिस ने बांद्रा कोर्ट में चार्जशीट दायर की थी। यह चार्जशीट एक हजार से अधिक पन्नों की है और इसमें कई महत्वपूर्ण साक्ष्य पेश किए गए हैं, जो जांच के दौरान आरोपी शरीफुल इस्लाम के खिलाफ प्राप्त हुए थे।

पुलिस के अनुसार, इस चार्जशीट में फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया गया है, जो इस मामले में एक अहम बिंदु साबित हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, घटनास्थल से जो चाकू का टुकड़ा सैफ अली खान के शरीर से और आरोपी के पास से मिला था, वह सभी एक ही चाकू के तीन अलग-अलग टुकड़े थे। इससे यह साफ होता है कि हमलावर ने सैफ अली खान पर हमला करने के लिए उसी चाकू का इस्तेमाल किया था।

इसके अलावा, पुलिस को जांच के दौरान आरोपी शरीफुल इस्लाम के बाएं हाथ की उंगलियों के निशान भी मिले हैं। इन फिंगरप्रिंट्स की रिपोर्ट का भी चार्जशीट में उल्लेख किया गया है, जिससे आरोपी की संलिप्तता और भी स्पष्ट होती है। बांद्रा पुलिस ने इस मामले में आरोपी शरीफुल इस्लाम को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। अब चार्जशीट दायर करने के साथ ही मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया को तेज किया जा रहा है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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