Sharad Pawar statement on MVA Unity: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के चीफ शरद पवार के महा-विकास अघाडी (एमवीए) को लेकर दिए बयान के बाद महाराष्ट्र में सियासी खलबली देखने को मिली। हालांकि, सोमवार (25 अप्रैल, 2023) को उनकी ओर से अपनी टिप्पणी पर सफाई भी दी गई, जिसमें वह बोले कि बातचीत केवल कर्नाटक विधानसभा चुनाव की कुछ सीटों को लेकर थी।
दरअसल, एक रोज पहले यानी रविवार (24 अप्रैल, 2023) को पवार से सवाल हुआ था कि क्या एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) का गठजोड़ एमवीए 2024 का चुनाव साथ में लड़ेगा? शरद बोले थे, “साथ काम करने की ख्वाइश है, पर सिर्फ इच्छा ही हमेशा काफी नहीं होती। सीट आवंटन...और कोई मसला है या नहीं? इन सब पर फिलहाल बात नहीं हुई है, तो मैं आपको कैसे बता सकता हूं।”
उन्होंने आगे साफ किया था कि वंचित बहुजन अघाड़ी के मुखिया प्रकाश आंबेडकर के साथ मीटिंग के वक्त आंबेडकर के नेतृत्व वाले संगठन के एमवीए में शामिल होने के मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई थी। उन्होंने सोमवार को बताया, “हमारी बात महज कर्नाटक विस चुनाव की कुछ सीटों को लेकर थी।” इस बीच, सोमवार को एक मराठी न्यूज चैनल ने अनौपचारिक रूप से उनका हवाला देते हुए बताया कि उन्होंने एमवीए पर टिप्पणी की क्योंकि एमवीए घटकों के बीच सीट वितरण पर कोई स्पष्टता नहीं है और इसमें कुछ और नहीं समझा जाना चाहिए।
एनसीपी सूत्रों के हवाले से चैनल ने यह भी बताया कि वह एमवीए की ‘वज्रमुठ’ (लोहे की मुट्ठी) रैलियों में शामिल नहीं होंगे। सबसे रोचक बात यह है कि पवार की ये सारी टिप्पणियां ऐसे समय पर आई हैं, जब एनसीपी नेता और उनके भतीजे अजित पवार के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में जाने की अटकल थीं। हालांकि, बाद में अजीत की ओर से कहा गया कि वह अंतिम सांस तक एनसीपी नहीं छोड़ेंगे, पर उनके स्पष्टीकरण से अटकलों को खत्म करने में खासा मदद न मिली।
इस बीच, संजय राउत ने दावा किया कि पर्दे के पीछे मुख्यमंत्री शिंदे को बदलने की गतिविधियां चल रही हैं, “क्योंकि शिंदे वह हासिल करने में विफल रहे हैं जो भाजपा चाहती थी।” राउत ने आगे बताया, “वे (भाजपा) हमारी (उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली) सरकार को गिराना चाहते थे, इसलिए उनका (शिंदे का) इस्तेमाल किया गया। अब उनका मकसद पूरा हो गया है, इसलिए जल्द ही शिंदे को बदल दिया जाएगा।”
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा कि कांग्रेस उन लोगों के साथ आगे बढ़ेगी जो एमवीए गठबंधन में रहेंगे। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “कांग्रेस की भूमिका यह सुनिश्चित करना है कि भाजपा विरोधी दल एक साथ लड़ें। गठबंधन में अन्य दलों की भूमिका अलग हो सकती है। हम यह नहीं पूछ रहे हैं कि किसी के दिमाग में क्या है।” उन्होंने राकांपा की अंदरूनी राजनीति पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। आगे बोले, “यहां तक कि शरद भी इस मुद्दे पर नहीं बोलते हैं तो मैं कैसे टिप्पणी कर सकता हूं।” (पीटीआई-भाषा इनपुट्स के साथ)
