Maharashtra News : मराठा आरक्षण के लिए आंदोलन कर रहे मनोज जरांगे पाटिल ने अपने अनशन को विराम दे दिया है। इधर महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर हुई हिंसा मामले में बुधवार को बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने सख्त निर्देश दिए। हाई कोर्ट ने आंदोलनकारियों के प्रदर्शन को उनका मौलिक अधिकार बताया है, लेकिन साथ ही राज्य सरकार को भी हिंसा होने की हालत में एक्शन लेने का पूरा हक होने की बात कही है। कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाई कोर्ट में हुई बहस के दौरान यह साफ नजर आया कि हिंसा के लिए भूख हड़ताल पर बैठे मनोज जारांगे पाटिल की जिद जिम्मेदार है, जो राज्य सरकार के आरक्षण की राह खोलने का तरीका तलाशने के लिए आश्वासन देने के बावजूद भूख हड़ताल खत्म नहीं कर रहे हैं और पूरे राज्य में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर लोग सड़क पर उतरने लगे हैं।
क्या हुआ कोर्ट में
मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र उपाध्याय एवं न्यायमूर्ति अरुण पेडनेकर की बेंच के निर्देश पर औरंगाबाद बेंच के सामने हुई सुनवाई पर अदालत ने कहा, 'विभिन्न तरीकों से विरोध करना हर किसी का मौलिक अधिकार है लेकिन, इसके कारण राज्य में कानून-व्यवस्था न बिगड़े, इसका हमें ध्यान रखना होगा। चूंकि प्रदर्शनकारियों को विरोध करने का अधिकार है, इसलिए कानून-व्यवस्था बनाए रखना राज्य की जिम्मेदारी है।'
29 अगस्त से चल रहा आंदोलन
उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई थी जिसमें मराठा आंदालेन समेत कई मुद्दों को रेखांकित किया गया थ। इस पर बुधवार को सुनवाई हुई। नीलेश शिंदे द्वारा दायर याचिका में बताया गया कि 29 अगस्त से आंदोलन चल रहा है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में आंदोलन भी हो रहा है और इसके कारण कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा हो गई है, करीब 14-15 बसें जला दी गई हैं, जारांगे की तबीयत भी बिगड़ती जा रही है। ऐसे में राज्य सरकार को उनकी स्थिति पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है।
सीएम एकनाथ शिंदे से बात करने की मांग
मनोज जरांगे ने अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त करने से पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात करने की मांग की थी। राज्य के उद्योग मंत्री उदय सामंत ने देर रात धरना स्थल पर पहुंचकर जरांगे से मुलाकात की थी। जरांगे ने कहा, 'मैं चाहता हूं कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे यहां आएं, ताकि मैं मराठा आरक्षण की मांग को लेकर जारी अपना अनशन वापस ले सकूं. हम बाद में इसी धरना स्थल पर अपने समर्थकों के साथ क्रमिक उपवास जारी रखेंगे।' मनोज जरांगे पाटिल ने 10 सितंबर को भूख हड़ताल की मांग को ठुकराते हुए कहा था कि जब तक मराठा समुदाय को कुनबी जाति के प्रमाणपत्र नहीं दिए जाएंगे, तब तक वह भूख हड़ताल पर रहेंगे लेकिन अब उन्होंने मराठा समुदाय को आरक्षण मिले बगैर ही अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है।
