मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने एक ऐसी साइबर क्राइम गैंग का पर्दाफाश किया है, जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया। यह गिरोह फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते और सिम कार्ड एक्टिवेट कर करोड़ों रुपये की ऑनलाइन ठगी को अंजाम दे रहा था। पुलिस की इस शानदार कार्रवाई ने अब तक के सबसे बड़े साइबर धोखाधड़ी मामलों में से एक को उजागर किया है।
गुप्त सूचना पर कार्रवाई करते हुए कांदिवली (पूर्व) स्थित डी.जी. सर्च कंसल्टन्सी और प्रिरीत लॉजिस्टिक प्रा. लि. के ऑफिस पर छापा मारा गया। वहां से पुलिस ने आरोपी वैभव पटेल, सुनीलकुमार पासवान, अमनकुमार गौतम, खुशबू संदराजुळा और रितेश बांदेकर को रंगेहाथ गिरफ्तार किया। मौके से पुलिस को 2 लैपटॉप, 1 प्रिंटर, 25 मोबाइल, 25 पासबुक, 30 चेकबुक, 46 एटीएम कार्ड, स्वाइप मशीन और 104 सिम कार्ड बरामद हुए।
जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी महज 7 से 8 हजार रुपये में बैंक डिटेल्स खरीदते और उन्हें एक्टिवेट कर साइबर अपराधियों को बेच देते थे। अब तक इस मामले में कुल 12 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।
तकनीकी जांच में इस गिरोह की असली करतूत सामने आई। लैपटॉप से 943 बैंक खातों की डिटेल्स मिलीं, जिनमें से 181 खातों का इस्तेमाल सीधे साइबर फ्रॉड के लिए किया गया। साइबर हेल्पलाइन 1930 पर इन खातों से जुड़ी 339 शिकायतें दर्ज हुईं— जिनमें मुंबई से 16, महाराष्ट्र के अन्य जिलों से 46 और देशभर से 277 शिकायतें शामिल हैं।
पुलिस के मुताबिक, ठगी का आंकड़ा दहला देने वाला है—
मुंबई: 1.67 करोड़ रुपये
महाराष्ट्र के अन्य जिले: 10.57 करोड़ रुपये
देशभर: 60.82 करोड़ रुपये
यह पूरी कार्रवाई पुलिस आयुक्त देवेन भारती और उनकी टीम के नेतृत्व में हुई। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि संदिग्ध कॉल, ईमेल या ऑनलाइन ऑफर पर भरोसा न करें और किसी भी ठगी की स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
यह सनसनीखेज खुलासा बताता है कि डिजिटल दुनिया के ठग कितने संगठित हो चुके हैं, लेकिन मुंबई पुलिस की चौकसी और सख्ती ने उनके मंसूबों पर बड़ा ब्रेक लगा दिया है।
