मुंबई

'मैं बालासाहेब का शिवसैनिक हूं, मुझे हल्के में मत लीजिए'; CM शिंदे ने उद्धव को सुना दी खरी-खोटी

CM Shinde Slams Opposition: विपक्ष को चुनौती देते हुए शिंदे ने कहा, "महायुति पिछले ढाई साल में सरकार की उपलब्धियों को पेश करने के लिए तैयार है। हम हर तालुका में एक संविधान भवन बनाएंगे और इसके लिए 10 लाख रुपये आवंटित करेंगे। हमने किसानों को 46,000 करोड़ रुपये की सहायता भी दी है। क्या आपको अभी भी एहसास नहीं है कि एक गरीब आदमी का बेटा मुख्यमंत्री बन गया है?"

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एकनाथ शिंदे, मुख्यमंत्री, महाराष्ट्र।

Eknath Shinde vs Uddhav Thackeray: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शनिवार को कहा कि लोकसभा चुनाव में महा विकास आघाडी (एमवीए) की सफलता संक्षिप्त अवधि के लिए है, जिसे आगामी विधानसभा चुनाव में दोहराया नहीं जा सकेगा। दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में शिवसेना की दशहरा रैली को संबोधित करते हुए शिंदे ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) की तुलना असदुद्दीन ओवैसी नीत ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) से की और मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति को रेखांकित किया।

सीएम एकनाथ शिंदे ने क्यों कहा- मुझे हल्के में मत लीजिए

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने आजाद मैदान में शिवसेना की विशाल दशहरा सभा में कहा, "हमने उस सरकार को हटा दिया जिसने विकास पर गतिरोधक लगाए और प्रगति को बाधित किया। एक सच्चा शिवसैनिक कभी भी युद्ध के मैदान या अपने आदर्शों को नहीं छोड़ता।" अपने विरोधियों को एक साहसिक बयान में शिंदे ने चेतावनी दी और कहा कि "मैं बालासाहेब का शिवसैनिक हूं। मैं पीछे नहीं हटूंगा। मुझे हल्के में मत लीजिए।"

बालासाहेब के आदर्शों के साथ विश्वासघात करने का आरोप

शिंदे ने कहा, 'लोकसभा चुनाव में, महाराष्ट्र में महा विकास आघाडी की सफलता संयोगवश थी, स्थायी नहीं है। लोकसभा चुनाव में शिवसेना ने शिवसेना (यूबीटी) से सीधी टक्कर में 7 सीटें जीतीं और उसे छह निर्वाचन क्षेत्रों तक सीमित कर दिया। यह सफलता दर्शाती है कि हम ही असली शिवसेना हैं।' जून 2022 में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के खिलाफ अपनी बगावत को याद करते हुए शिंदे ने कहा कि उन्होंने असली शिवसेना को उन लोगों से आजाद कराया, जिन्होंने बालासाहेब ठाकरे के आदर्शों के साथ विश्वासघात किया था।

सरकार गिरने की भविष्यवाणी करने वालों का उड़ाया मजाक

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने इस कार्यक्रम का इस्तेमाल विपक्ष की तीखी आलोचना करने के लिए किया। "यह आजाद शिवसेना की आजाद रैली है। आज आजाद मैदान में भगवा लहर है, लेकिन यह शर्मनाक है कि शिवसेना यूबीटी महज कंकड़ को हीरा समझकर उन्हें हिंदू कह रही है। हमारी सरकार महाराष्ट्र विपक्षी गठबंधन को घर भेजकर सत्ता में आई है," शिंदे ने उन लोगों का मजाक उड़ाया जिन्होंने उनकी सरकार के गिरने की भविष्यवाणी की थी।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि महाराष्ट्र के लोग आगामी चुनावों में महायुति को निर्णायक जनादेश देंगे। उन्होंने कहा कि "मेरे प्यारे भाई-बहन, वरिष्ठ नागरिक और किसान इस सरकार के ब्रांड एंबेसडर हैं। हम लोगों के सामने मजबूती से खड़े हैं। आइए विपक्ष के झूठे आख्यान को तोड़ें और हिंदुत्व के गौरव को बनाए रखें।"

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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