मुंबई: महाराष्ट्र में मराठी और हिंदी भाषा को लेकर जारी विवाद के बीच महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। एडवोकेट नित्यानंद शर्मा, पंकज कुमार मिश्रा और आशीष राय ने संयुक्त रूप से राज्य के पुलिस महानिदेशक को शिकायत पत्र सौंपते हुए ठाकरे के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिकायत के अनुसार, 5 जुलाई 2025 को मुंबई के वर्ली डोम में आयोजित एक सार्वजनिक सभा में राज ठाकरे ने अपने भाषण में उत्तेजक और विभाजनकारी वक्तव्य दिए। उन्होंने कथित तौर पर कहा, “परप्रांतीयों के साथ किसी भी घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग न करें,” जो शिकायतकर्ताओं के अनुसार एक आपराधिक कृत्य को छुपाने या साक्ष्य मिटाने के इरादे को दर्शाता है।
प्रवासी नागरिकों के विरुद्ध नफरत और हिंसा फैलाने वाला बताया
शिकायतकर्ताओं ने इस बयान को राज्य में रह रहे प्रवासी नागरिकों के विरुद्ध नफरत और हिंसा फैलाने वाला बताया है। उन्होंने कहा कि भाषण के बाद MNS कार्यकर्ता आक्रामक हो गए और विभिन्न स्थानों पर बाहरी राज्यों से आए लोगों को मराठी बोलने के लिए मजबूर किया गया। न मानने पर धमकियां, गाली-गलौज और शारीरिक हिंसा की घटनाएं सामने आईं। शिकायत पत्र में राज ठाकरे सहित अन्य जिम्मेदारों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं में कार्रवाई की मांग की गई है, जिनमें शामिल हैं:
- धारा 192 – भाषा के आधार पर नफरत फैलाना
- धारा 353 – सार्वजनिक शांति भंग करने वाला भाषण
- धारा 351(2) और 351(3) – गंभीर धमकी देना
- धारा 61(2) – आपराधिक साजिश रचना
शिकायत में कठोर कार्रवाई की मांग
इसके अतिरिक्त, शिकायत में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA), 1980 के तहत भी कठोर कार्रवाई की मांग की गई है। आरोप है कि ठाकरे का भाषण सामाजिक सौहार्द और राज्य की आंतरिक शांति को प्रभावित करने वाला है, जिससे देश की एकता और अखंडता को खतरा हो सकता है। शिकायतकर्ताओं ने राज्य सरकार से यह भी आग्रह किया है कि वह महाराष्ट्र में रह रहे सभी भारतीय नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और इस प्रकार की विघटनकारी राजनीति पर सख्त और सार्वजनिक विरोध दर्ज कराए। इस मामले में अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
