महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाले शिवसेना के धड़े की मंगलवार को अहम बैठक हुई, जिसमें पार्टी नेताओं ने एक सुर से अपनी शिवसेना का नेता शिंदे का मान लिया। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से पहले गुट ने मीडिया से खुद को ‘शिंदे धड़ा’ कहने की बजाया शिवसेना कहने की अपील की। दरअसल, पिछले हफ्ते चुनाव आयोग ने उद्धव ठाकरे गुट के साथ चल रहे विवाद के सिलसिले में शिंदे गुट को असली शिवसेना की मान्यता दी थी और उसे पार्टी का चुनाव निशाना ‘तीर-धनुष’ आवंटित किया था।
मीडिया घरानों से इस बाबत अपील करते हुए पार्टी सचिव संजय भौराव मोरे की ओर से एक लेटर जारी किया गया। पत्र में कहा गया, ‘‘आयोग के आदेशानुसार शिंदे गुट कहने के बजाय उसे शिवसेना कहा जाना चाहिए। आपके प्रतिनिधि को आगे के कवरेज के लिए विस्तृत सूचना दी जानी चाहिए।’’
वहीं, सूबे के कैबिनेट मंत्री दीपक केसरकर ने मंगलवार को कहा कि शिंदे गुट मुंबई में शिवसेना भवन या राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी खेमे से जुड़ी किसी भी अन्य संपत्ति को लेने में दिलचस्पी नहीं रखता है। उन्होंने आगे दावा किया कि ठाकरे का नेतृत्व वाला प्रतिद्वंद्वी गुट निर्वाचन आयोग के फैसले के बाद इस मुद्दे पर सहानुभूति हासिल करने की कोशिश कर रहा है।
केसरकर के मुताबिक, शिंदे ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि उनका गुट शिवसेना भवन, मध्य मुंबई के दादर स्थित पार्टी मुख्यालय, या ठाकरे समूह से जुड़ी किसी भी संपत्ति पर दावा करने में दिलचस्पी नहीं रखता तथा दिवंगत बाल ठाकरे की ओर से दिए गए विचार उनकी असली संपत्ति है। पत्रकारों से वह आगे बोले, ‘‘उद्धव ठाकरे इस मुद्दे से सहानुभूति हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। हमें कुछ नहीं चाहिए क्योंकि हमारे पास दिवंगत बालासाहेब ठाकरे के विचार हैं।’’ (भाषा इनपुट्स के साथ)
