शहर

गणतंत्र दिवस से पहले एमपी सरकार का बड़ा फैसला; 87 आजीवन कैदियों को मिलेगी आजादी

मध्य प्रदेश सरकार ने 77वें गणतंत्र दिवस से पहले एक बड़ा कदम उठाते हुए 87 आजीवन कारावास भुगत रहे कैदियों को समय से पहले रिहाई की मंजूरी दी है। इस फैसले से जेलों में भीड़ कम करने और कैदियों के पुनर्वास को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि यह निर्णय प्रत्येक मामले की गहन समीक्षा और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के बाद लिया गया है।

Image

मध्य प्रदेश में गणतंत्र दिवस 2026 से पहले 87 आजीवन कैदियों को मिलेगी रिहाई (सांकेतिक फोटोे)

Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश सरकार ने 77वें गणतंत्र दिवस से पहले एक अहम फैसला लिया है। राज्य सरकार ने प्रदेश की विभिन्न जेलों में सजा काट रहे 87 आजीवन कारावास भुगत रहे कैदियों को समय से पहले रिहा करने की अनुमति प्रदान की है। जेल विभाग द्वारा 27 मई 2025 को जारी दिशा-निर्देशों के तहत कुल 481 मामलों की गहन समीक्षा की गई, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, जिला स्तर पर गठित समितियों ने प्रत्येक मामले की कानूनी स्थिति, अपराध की प्रकृति, पृष्ठभूमि और अन्य जरूरी तथ्यों का बारीकी से मूल्यांकन किया।

इस समीक्षा प्रक्रिया के दौरान यह पाया गया कि 481 मामलों में से 394 दोषी समय से पहले रिहाई की शर्तों को पूरा नहीं करते थे, इसलिए उन्हें अपात्र घोषित किया गया। यह निर्णय दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धाराओं 432, 433 और 433(ए) के अंतर्गत लिया गया है, जो राज्य को विशेष परिस्थितियों में सजाओं को माफ करने या घटाने का अधिकार देती हैं। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि रिहाई प्रक्रिया के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू रहेगी। साथ ही, जिन कैदियों के खिलाफ हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में अपील लंबित है, वे केवल तभी रिहाई के लिए पात्र होंगे जब उनके मामलों का निपटारा 26 जनवरी, 2026 तक हो जाए।

अधिकारियों ने क्या बताया?

इसके साथ ही, जिन कैदियों पर जुर्माना लगाया गया है, उन्हें वह राशि अदा करनी होगी या जुर्माने के विकल्प के रूप में अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा। वहीं, अन्य मामलों में सजा काट रहे दोषियों को रिहाई से पहले अपनी निर्धारित सजा पूरी करनी अनिवार्य होगी। जिन कैदियों के खिलाफ मुकदमे लंबित हैं, वे विचाराधीन बने रहेंगे, और अंतरराज्यीय मामलों में रिहाई से पहले उन्हें स्थानांतरित किया जा सकता है। आजीवन कारावास भुगत रहे दोषियों के अलावा, सात ऐसे कैदियों को भी सजा में राहत दी गई है, जिनकी सजा आजीवन नहीं थी। अधिकारियों ने बताया कि अधिकांश मामलों में अस्वीकृति इसलिए हुई क्योंकि दोषियों ने राज्य नीति के तहत आवश्यक 20 वर्ष का कारावास (सजा में कटौती सहित) पूरा नहीं किया था।

क्यों लिया गया यह निर्णय?

गणतंत्र दिवस के मौके पर लिया गया यह निर्णय, जेलों में भीड़ कम करने और कैदियों के पुनर्वास को बढ़ावा देने के लिए की जाने वाली वार्षिक पहलों का हिस्सा है। साथ ही, प्रत्येक मामले की गहन समीक्षा कर यह सुनिश्चित किया गया है कि सार्वजनिक सुरक्षा भी बनी रहे। जेल सुधार समर्थकों ने इस फैसले का स्वागत किया और इसे मानवीय दृष्टिकोण के अनुरूप बताया। उन्होंने यह भी कहा कि रिहाई के बाद कैदियों के व्यवहार पर निगरानी रखना जरूरी है ताकि उनका समाज में पुनः समावेश सुनिश्चित हो सके। मध्य प्रदेश की जेलों में हजारों कैदी बंद हैं, और इस पहल से सरकार की न्याय और दया के बीच संतुलन बनाने की कोशिश उजागर होती है।

(इनपुट - आईएएनएस)

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदीauthor

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अपडेट्स पर लगातार काम करते हैं। निलेश महत्वपूर्ण विवरणों को चुनने और पाठकों की रुचि के हिसाब से कंटेंट को प्रभावी तरीके से पेश करने के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल न्यूजरूम के रफ्तार भरे माहौल में वे हर खबर को सटीक एंगल, आसान भाषा और उपयोगी जानकारी के साथ पेश करने पर फोकस करते हैं और अबतक 2,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं।

और पढ़ें
End of Article