Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से एक बेहद ही हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जिले में सांप के काटने से मौत के फर्जी मामले बनाकर सरकारी मुआवजे के नाम पर लाखों रुपये की हेराफेरी करने के आरोप में एक डॉक्टर, दो होमगार्ड और एक वकील समेत 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। बिलासपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) रजनीश सिंह ने बताया कि गिरोह ने चिकित्सा और राजस्व विभाग के फर्जी दस्तावेज तैयार किए और प्राकृतिक एवं अन्य कारणों से होने वाली मौतों के लिए चलाई जा रही राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 योजना के तहत धोखे से 64 लाख रुपये की सरकारी राहत राशि हड़प ली।
हर सदस्य ने अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं
जांच के अनुसार, नवंबर 2019 और फरवरी 2024 के बीच धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए गिरोह के हर सदस्य ने अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने बताया कि मामले में अब तक बिलासपुर के सरकंडा, सिविल लाइंस, कोनी, सिटी कोतवाली, सिरगिट्टी और तोरवा थानों में 16 एफआईआर दर्ज की गई हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले कुछ दिनों में 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है। उन्होंने बताया कि आरोपियों में से डॉ. प्रियंका सोनी (37) एमबीबीएस और एमडी है और उसे रविवार को महाराष्ट्र के नागपुर में पकड़ा गया, जबकि होम गार्ड रामकुमार पटनवार (40) और रामेश्वर भास्कर (53) को सोमवार को गिरफ्तार किया गया।
फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार कीं
पुलिस अधिकारी ने आगे बताया कि कथित अपराध के समय तीनों की तैनाती बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सीआईएमएस) में थी। पुलिस के अनुसार, होमगार्ड जवान अस्पताल में शव आने की सूचना गिरोह को देते थे, जबकि एक वकील शोकाकुल परिजनों को सर्पदंश से मौत का झूठा दावा करने के लिए तैयार करता था और फर्जी प्रमाणपत्र उपलब्ध कराता था। जांच से पता चला है कि आरोपियों ने साधारण बीमारी, कैंसर, आत्महत्या और अन्य कारणों से हुई मौतों के पुराने मामलों का इस्तेमाल किया और सीआईएमएस के चिकित्सकों के नाम से फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार कीं, जिनमें मौत का कारण सांप का काटना बताया गया था।
64 लाख रुपये का भुगतान
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने कहा कि गिरोह ने चिकित्सकों, पुलिसकर्मियों, पटवारियों तथा अन्य सरकारी अधिकारियों की मुहर और हस्ताक्षरों की भी जालसाजी की, ताकि दस्तावेज असली प्रतीत हों। इन फर्जी अभिलेखों के आधार पर मुआवजे के दावों को मंजूरी मिली और राशि लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा कराई गई, जिसके बाद आरोपियों ने आपस में धन का बंटवारा कर लिया। उन्होंने बताया कि अब तक की जांच में 16 फर्जी मुआवजा दावों का पता चला है, जिनमें कुल लगभग 64 लाख रुपये का भुगतान किया गया। हर मामले में कथित तौर पर लाभार्थी को करीब 50 हजार रुपये दिए गए, जबकि बाकी राशि गिरोह के सदस्यों ने आपस में बांट ली। गिरफ्तार अन्य आरोपियों में गिरोह का कथित सरगना एवं वकील हीरा प्रसाद खांडेकर, बैंक कर्मचारी कुश कुमार गुप्ता, दिहाड़ी मजदूर गोविंद विश्वकर्मा तथा सरकारी कर्मचारी गरीब राम बिजवाड़, नरेंद्र कौशिक और हरिशंकर राठौर सहित अन्य लोग शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जांच जारी है।
