Maharashtra Paneer Rule: महाराष्ट्र में रेस्तरां और फूड आउटलेट्स के लिए नया नियम लागू किया है। अब ग्राहकों को साफ-साफ बताना होगा कि उन्हें परोसा जा रहा पनीर असली है या उसका कोई विकल्प इस्तेमाल किया गया है। यह नियम राज्य के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने लागू किया है। इसका मकसद ग्राहकों को सही जानकारी देना और उन्हें पनीर के बजाय सस्ते गैर-डेयरी विकल्पों के उपयोग से गुमराह होने से बचाना है।
अब मेनू में दिखेगा पनीर का पूरा सच
एक अधिकारी ने बताया कि निर्देश के अनुसार, रेस्तरां, होटल और खानपान सेवा प्रदाता सहित सभी खाद्य व्यवसायियों को अपने मेनू, बिल और ’डिस्प्ले बोर्ड’ पर पनीर के असली होने का या इसके अन्य विकल्प के उपयोग का स्पष्ट रूप से खुलासा करना होगा। उन्होंने कहा कि निर्माताओं और आपूर्तिकर्ताओं को ऐसे उत्पादों पर सटीक लेबल लगाने का निर्देश दिया गया है। इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
ग्राहकों से नहीं छिपेगी सच्चाई
पनीर पूरी तरह से दूध से बनता है, जबकि इसके विकल्प में ’चीज’ खाद्य तेलों, स्टार्च और इमल्सीफायर का उपयोग करके तैयार किया जाता है। हालांकि ऐसे विकल्पों को असुरक्षित नहीं माना जाता है लेकिन अधिकारियों ने कहा कि उपभोक्ताओं को यह जानकारी दी जानी चाहिए कि उन्हें क्या परोसा जा रहा है। यह कदम उन शिकायतों के बाद उठाया गया है कि कई प्रतिष्ठान ग्राहकों को सूचित किए बिना पनीर के विकल्प से बने पनीर-आधारित व्यंजन परोस रहे थे।
इस कदम का समर्थन करते हुए, मुंबई के कई भोजनालयों का प्रतिनिधित्व करने वाले होटल एवं रेस्टोरेंट एसोसिएशन (पश्चिमी भारत) ने कहा कि उसके नेतृत्व ने नियामक के साथ बातचीत की है और वह अनुपालन करने के लिए प्रतिबद्ध है। एसोसिएशन ने कहा कि एक प्रतिनिधिमंडल ने निर्देश के कार्यान्वयन पर चर्चा करने के लिए एफडीए आयुक्त श्रीधर दुबे पाटिल से मुलाकात की थी। एसोसिएशन के एक वरिष्ठ प्रतिनिधि ने कहा कि ऐसे उत्पादों का उपयोग किए जाने पर उन्हें ’’चीज विकल्प’’ के रूप में लेबल किए जाने की सदस्यों को सलाह दी गई है।
(इनपुट - भाषा)
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