Yogi Adityanath slams Samajwadi Party on burning ramcharitmanas: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को सदन में समाजवादी पार्टी पर खूब तंज कसा। रामचरित मानस पर चल रहे विवाद पर योगी आदित्यनाथ मुखर हुए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बयानों व उदाहरणों से समाजवादी पार्टी पर खूब प्रहार किया। सीएम ने कहा कि जब हमारे मंत्रिसमूह के सदस्य जीआईएस के लिए देश-विदेश जाकर यूपी की समृद्धि का मार्ग तय करने लगे, तब इन लोगों ने जानबूझकर मध्यकालीन के प्रसिद्ध धार्मिक ग्रंथ रामचरित मानस व तुलसीदास को लेकर नया शिगूफा छेड़ने का प्रयास किया। संत तुलसीदास ने जिस काल खंड में रामचरित मानस की रचना की, तब उन जैसे साधक-संत को सत्ता (अकबर) का बुलावा आया था। तब तुलसीदास ने 'हम चाकर रघुवीर के, पटव लिखो दरबार, तुलसी अब का होइहे नर के मनसबदार' कहकर अच्छा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हमारे एक ही राजा हैं, वह राम हैं। राम के अलावा मैं किसी को राजा नहीं मानता हूं। रामलीलाओं का प्रचलन स्वामी तुलसीदास की देन है। इसी के माध्यम से मध्यकाल में तुलसीदास ने समाज को एकजुट किया था। तुलसीदास ने कहा था कि बोलो-राजा रामचंद्र की जय।
यह लोग पूरे समाज को अपमानित करना चाहते हैं
सीएम ने कहा कि कुछ लोगों ने तुलसीदास का अपमान व रामचरित मानस को फाड़ने का प्रयास किया। यह कृत्य किसी अन्य मजहब के साथ हुआ होता तो क्या स्थिति होती। जिसकी मर्जी आए, वह हिंदुओं का अपमान कर ले, अपने अनुरूप शास्त्रों की विवेचना कर ले। सीएम ने सपा को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि आप पूरे समाज को अपमानित करना चाहते हैं।
मॉरीशस में भी लोगों के घरों में श्रद्धा का केंद्र है रामचरित मानस
सीएम ने संस्मरण सुनाया कि मैं प्रवासी भारतीय दिवस के कार्यक्रम में मॉरीशस गया था। पूर्वी यूपी व बिहार से पौने दो सौ वर्ष पहले जो लोग गिरमिटिया मजदूर बनाकर वहां गए थे। आज वे लोग अलग-अलग देशों के राष्ट्राध्यक्षों के रूप में हैं। मैंने उन लोगों से पूछा कि आपके पूर्वज कोई चीज विरासत में लाए हों, ऐसा कुछ बचा है। तब उन्होंने बताया कि हमारे घर में रामचरित मानस का गुटका है। मैंने पूछा कि क्या आप उसे पढ़ना जानते हैं, उन्होंने कहा कि नहीं, लेकिन विरासत में जो सीखा है, उसे याद रखते हैं।
आप देश-दुनिया के 100 करोड़ हिंदुओं को अपमानित कर रहे हैं
सीएम ने समाजवादी पार्टी को निशाने पर लेते हुए कहा कि गौरव की अनुभूति होनी चाहिए कि यूपी राम और श्रीकृष्ण की धरती है, गंगा-यमुना और संगम की धऱती है। यूपी की धरती पर रामचरित मानस और वाल्मीकि रामायण जैसे पवित्र ग्रंथ रचे गए। आप उसे जलाकर देश-दुनिया के 100 करोड़ हिंदुओं को अपमानित कर रहे हैं। ऐसी अराजकता को कोई कैसे स्वीकार कर सकता है। मुझे एक पंक्ति याद आती है... जाके प्रभु दारुण दुख दीन्हा, ताके मति पहले हर लीन्हा...।
