लखनऊ

गोलबंदी या पारिवारिक कार्यक्रम : 'कुटुंब परिवार' के नाम पर लखनऊ के होटल में इकट्ठा हुए 43 ठाकुर विधायक

उत्तर प्रदेश विधानसभा सत्र के दौरान लखनऊ में 43 ठाकुर विधायकों की बैठक ने राजधानी में सियासी हलचल बढ़ा दी है। बीजेपी के साथ ही सपा के बागी विधायक शामिल हुए, जहां सांस्कृतिक प्रतीक भेंट किए गए। इसे निजी कार्यक्रम बताया जा रहा है, लेकिन बड़ी संख्या में क्षत्रिय विधायकों की मौजूदगी ने इसे ठाकुर समुदाय की गोलबंदी और भविष्य की राजनीति से जोड़ दिया।

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लखनऊ में जुटे 43 ठाकुर विधायक

11 अगस्त यानी सोमवार को ही उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र शुरू हुआ है। विधानसभा के इस सत्र के लिए सभी दलों के विधायक लखनऊ पहुंचे हुए हैं। उसी शाम यानी सोमवार को लखनऊ के होटल क्लार्क अवध में ठाकुर विधायकों की एक बड़ी बैठक का आयोजन हुआ।

यह आयोजन बीजेपी के ठाकुर विधायक ओमवीर सिंह ने ‘कुटुंब परिवार’ के बैनर तले किया था। विधानसभा में कल 49 ठाकुर विधायकों में से करीब 43 विधायक इस बैठक में शामिल भी हुए। इनमें बीजेपी के साथ ही सपा के बागी विधायक भी मौजूद थे। यहां उपस्थित सभी विधायकों को भगवान श्रीराम की मूर्ति, महाराणा प्रताप की तस्वीर और पीतल का एक त्रिशूल भी भेंट किया गया, जिसे सांस्कृतिक और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक माना जा रहा है।

अगले दिन यानी मंगलवार 12 अगस्त को इस बैठक की चर्चा सियासी गलियारों में काफी गर्म रही। इस डिनर में मौजूद विधायकों और आयोजकों के अनुसार डिनर कुंदरकी के विधायक रामवीर सिंह ने अपनी जीत की खुशी में रखा था। हालांकि, कुछ का यह भी कहना था कि उनकी पौत्री के जन्मदिन के उपलक्ष्य में यह डिनर रखा गया था। लेकिन सभी का दावा है कि इसमें कोई राजनीतिक मकसद नहीं था।

Kutumb Parivar

कुटुम्ब परिवार के तहत जुटे ठाकुर विधायक

इस बैठक में अधिकतर विधायक क्षत्रिय समुदाय से थे, जबकि दूसरी जातियों के कुछ ही विधायक यहां ही थे। बीजेपी के कई विधायकों के साथ ही सपा से निष्कासित राकेश प्रताप सिंह और अभय सिंह भी इस बैठक में शामिल हुए थे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक 2029 के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर ठाकुर समुदाय की गोलबंदी का संकेत हो सकती है। खासकर जब पिछले लोकसभा चुनाव में इस समुदाय की नाराजगी की खबरें सामने आई थीं। बड़ी संख्या में विधायकों और विधान परिषद सदस्यों की मौजूदगी ने इस आयोजन को भविष्य की राजनीति से जोड़कर चर्चा को और तेज कर दिया है।

Vinod Mishra
विनोद मिश्राauthor

दिल्ली से लेकर यूपी की राजधानी लखनऊ में करीब दो दशक से टीवी पत्रकारिता कर रहें है। यूपी की सियासत की नब्ज और ब्यूरोकेसी की समझ है। पत्रकारिता एक पैशन है।

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