सॉफ्टवेयर बनाने की आड़ में नशे का कारोबार करने वाले व्यापारियों पर शिकंजा कसते हुए ईडी ने 3.24 करोड़ की 11 संपत्तियां जब्त की हैं। बताया जा रहा है कि कारोबारी प्रतिबंधित नशीली दवाएं अमेरिका सप्लाई करते थे। इसके लिए कारोबारियों ने लखनऊ के आशियाना और मुशी पुलिया के साथ गाजियाबाद में कॉल सेंटर भी खोले। हालांकि, ईडी ने कार्रवाई करते हुए कारोबारियों की करोड़ों की संपत्तियां जब्त कर ली। ईडी ने यह कार्रवाई नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो द्वारा 2017 में दर्ज मामले मनी लांड्रिंग के आधार पर की है।
सॉफ्टवेयर की बनाई थी नौ फर्जी कंपनियां
दरअसल, ईडी ने शुक्रवार को हत्श टेलीकॉम से जुड़े लोगों की लखनऊ, बाराबंकी और उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर स्थित संपत्तियों को कुर्क की है। मिली जानकारी के मुताबिक, कंपनी के निदेशक शांतनु गुप्ता, शशांक गुप्ता, अब्दुल वहाब यासिर, मोहित हलधर, पुनीत दुबे सहित अन्य ने नौ फर्जी सॉफ्टवेयर की कंपनियां बनाई थीं। हालांकि, इन कंपनियों की आड़ में लखनऊ के आशियाना और मुंशी पुलिया के साथ गाजियाबाद में कॉल सेंटर खोले गए। कॉल सेंटर की आड़ में नशीले पदार्थों का कोरोबार चला रहे थे।
अमेरिका भेजते थे माल
आरोपी कारोबारी कॉल सेंटर के जरिए से यूएसए में मौजूद अपने ग्राहकों को कॉल करते थे। वहां से साइकोट्रोपिक पदार्थों के ऑर्डर लेकर रैकेट का मास्टरमाइंड सागर अस्थाना और पुनीत दुबे नशीली दवाइयों को डाक से पार्सल कर देते थे। हालांकि, अब तक की जांच में कथित तौर पर कुर्क की गई सभी संपत्तियां 2013 और 2017 के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका में भेजे गए नशीले पदार्थों की तस्करी से प्राप्त अपराध की आय के माध्यम से अर्जित की गई थी। बताया जा रहा है कि इस माध्यम से इन कंपनियों के 43 बैंक खातों से कुल 23.67 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं।
