लखनऊ

Navratri 2023: लखनऊ के फेमस दुर्गा मंदिर, कोई 155 साल तो कोई 400 साल से भी ज्यादा है पुराना

  • Authored by: कुलदीप राघव
  • Updated Mar 14, 2023, 10:12 AM IST

Navratri 2023 Durga Mandir in Lucknow: नवाबों का शहर कहा जाने वाला लखनऊ तहजीब के साथ साथ आस्था के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां कई ऐसे दुर्गा मंदिर हैं जिनकी महिमा दूर दूर तक फैली है।

Image

Navratri 2023: लखनऊ के फेमस दुर्गा मंदिर, कोई 155 साल तो कोई 400 साल से भी ज्यादा है पुराना

Navratri 2023 Durga Mandir in Lucknow: नवाबों का शहर कहा जाने वाला लखनऊ जो अपनी तहजीब के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। इसके अलावा लखनऊ में कई सारे एतिहासिक और पुराने मंदिर हैं जिनके इतिहास की बात करें तो इनका इतिहास काफी पुराना है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से जुड़े नवाबी किस्से तो आपने जरूर सुने होंगे, इन्हीं किस्सों में कई ऐसी कहानियां भी सुनने को मिलती हैं जिसमें हिंदू-मुस्लिम एकता की परछाई दिखाई देती है। लखनऊ के इन मंदिरों से जुड़े ऐसे बहुत सारे किस्से हैं जिनको सुनकर आस्था और विश्वास का प्रमाण मजबूत होता है। नवरात्रि 22 मार्च 2023 से शुरू होकर 30 मार्च 2023 तक चलने वाला महापर्व है। इस पर्व पर हम आपको बताने जा रहे हैं लखनऊ के प्रसिद्ध 5 मंदिरों के बारे में जिनका दर्शन आपको नवरात्रि में जरूर करना चाहिए।

कालीबाड़ी मंदिर—

कैसरबाग घसियारीमंडी स्थित है 155 साल पुराना कालीबाड़ी मंदिर। मान्यता है कि मधुसूदन बनर्जी को माता भगवती ने सपने में आदेश किया था कि यहां मेरे मंदिर की स्थापना की जाए तो माता के आदेश का पालन करते हुए बनर्जी ने खुद मिट्टी की मूर्ति तैयार करके यहां स्थापित की थी। इस मंदिर की स्थापना अगस्त, 1863 में सिद्ध पीठ के रूप में हुई थी। 5 जीवों के मुंडों की आधारशिला पर माँ की प्रतिमा की स्थापना हुई है। शारदीय नवरात्र में यहां महिषासुर मर्दिनी का विशेष पाठ होता है।

चंद्रिका देवी मंदिर—

बख्शी का तालाब के कठवारा गांव में गोमती नदी के किनारे स्थित एतिहासिक तीर्थ माँ चंद्रिका देवी मंदिर पूरे नवरात्र घंटों और मां भवानी के जयकारों से गुंजता रहता है। इस पौराणिक तीर्थ का इतिहास स्कंद पुराण में उल्लेखित है। इस मंदिर के निकट एक प्रसिद्ध कुंड सुधन्वा कुंड है जिसकी मान्यता है कि इस कुंड में स्नान करने से लोगों को चर्म रोगों में लाभ होता है। ऐसी कहानी है कि महाराज दक्ष प्रजापति के श्राप से चंद्र देव को भी सुधन्वा कुंड में स्नान करने से क्षय रोग से मुक्ति मिली थी।

बड़ी काली जी मंदिर—

बड़ी काली जी मंदिर का इतिहास लगभग 700 साल पुराना है। बताया जाता है कि इस मंदिर में आदी गुरु शंकराचार्य ने माता की मूर्ति की स्थापना की है। जिस काली माँ की पूजा यहां होती हैं असल में वह माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की प्रतिमा है। मुगल काल में इस मंदिर पर हुए आक्रमण से प्रतिमा को बचाने के लिए इस मंदिर की प्रतिमा को कुंए में डाल दिया था। जिस कारण आस्था की धरोहर मंदिर तो बच गया लेकिन काली की मूर्ति की जगह लक्ष्मी-विष्णु की मूर्ति की स्थापना की गई। नवरात्र में इस मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।

छोटी काली जी मंदिर—

चूड़ी वाली गली का ढलान खत्म होते ही जैन मंदिर के सामने स्थित है छोटी काली जी मंदिर जो तकरीबन 400 साल पुराना मंदिर है। यहां स्थापित प्रतिमा मंदिर में स्थित कुंए से निकाली गई है ऐसा लोग बताते हैं।

दुर्गा मंदिर—

शास्त्री नगर स्थित दुर्गा मंदिर को नवरात्र में हर दिन अलग फूलों से सजाया जाता है। इस मंदिर में माँ ज्वाला के रूप में ज्योति की स्थापना की जाती है जिसका दर्शन करने के लिए नवरात्र में भक्तों का मेला लगा रहता है।

कुलदीप राघव
कुलदीप राघवauthor

कुलदीप राघव प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक अनुभव का रखने वाले पत्रकार हैं। टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में वह एजुकेशन सेक्शन को लीड कर रहे हैं। एजुकेशन सेक्टर की गहरी समझ और लगातार फील्ड-ओरिएंटेड रिपोर्टिंग के कारण कुलदीप इस बीट के भरोसेमंद पत्रकारों में गिने जाते हैं। वे स्कूल और उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाएं, एडमिशन और काउंसलिंग प्रोसेस, स्कॉलरशिप, करियर गाइडेंस, जॉब अलर्ट, स्किल डेवलपमेंट और युवाओं से जुड़े सामाजिक-शैक्षणिक मुद्दों पर तथ्यात्मक और आसान भाषा में खबरें पब्लिश करते हैं। कुलदीप ने अब तक 18,000 से अधिक बाइलाइन स्टोरीज लिखी हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, विश्लेषण, डेटा आधारित रिपोर्ट्स और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

और पढ़ें
End of Article
Subscribe to our daily Newsletter!