लखनऊ

माफिया अतीक के बाद अब मुख्तार अंसारी पर कसा शिकंजा, बेटे उमर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 11, 2023, 08:26 AM IST

Mukhtar Anasari son Umar Anasari: लखनऊ की एमपी-एमएलए कोर्ट ने शत्रु संपत्ति पर अवैध कब्जे के मामले में मुख्तार अंसारी के बेटे उमर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। यह मामला 27 अगस्त, 2020 का है, जिसमें हजरतगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी।

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मुख्तार अंसारी

Photo : BCCL

Arrest warrant against Mukhtar Anasari son Umar: माफिया अतीक अहमद के बाद मुख्तार अंसारी पर भी शिकंजा कसना शुरू हो गया है। कोर्ट ने उसके बेटे उमर अंसादी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। यह वारंट एमपी-एमएलए कोर्ट ने उसके खिलाफ अवैध निर्माण के केस में जारी किया है। इस मामले में अगली सुनवाई 24 अप्रैल को होनी है।

इससे पहले बांदा जेल में बंद मुख्तार अंसारी को सोमवार को मनी लॉन्ड्रिंग और शत्रु संपत्ति मामले में अलग-अलग कोर्ट में पेश किया गया था। मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में मुख्तार को सीबीआई की विशेष अदालत के सामने पेश किया गया तो शत्रु संपत्ति पर अवैध कब्जे को लेकर उसे एमपी-एमएलए कोर्ट में पेश किया गया था। दोनों मामलों में अगली सुनवाई 18 और 19 अप्रैल को होनी है। बता दें, इससे पहले उमेश पाल हत्याकांड मामले में माफिया अतीक अहमद पर भी शिकंजा कसा गया था। एमपी-एमएलए कोर्ट ने राजू पाल अपहरण मामले में उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वहीं हत्याकांड मामले में अतीक की पत्नी व बेटा फरार है।

उमर के खिलाफ पुलिस दायर कर चुकी है चार्जशीट

बता दें, अवैध निर्माण मामले में पुलिस की विवेचना पूरी हो चुकी है और पुलिस ने मुख्तार अंसारी, अब्बास अंसारी और उमर अंसारी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। बता दें, इस मामले में अब्बास अंसारी और उमर अंसारी के फरार होने के कारण कोर्ट ने मुख्तार अंसारी की फाइल को अलग कर दिया था। कोर्ट ने मामले की अलग से सुनवाई का आदेश दिया था।

क्या है मामला

यह मामला शत्रु संपत्ति पर अवैध कब्जे से जुड़ा हुआ है। लेखपाल सुरजन लाल ने 27 अगस्त, 2020 को हजरतगंत थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसमें कहा गया था कि मुख्तार अंसारी, अब्बास अंसारी और उमर अंसारी ने आपराधिक षड्यंत्र रचकर जमीन पर कब्जा किया और उस पर अवैध निर्माण कराया था। इसी मामले में उमर अंसारी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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