लखनऊ

सस्ते में कैसे मिलती है खुशियों की सौगात, चले आइये लव लेन मार्केट; मन मोह लेंगे डिजाइनर कपड़े

लखनऊ स्थित लव लेन मार्केट अपनी सस्ती कीमतों और अच्छी क्वालिटी के कपड़ों के लिए जानी जाती है। यहां आपको विभिन्न प्रकार के कपड़े मिल जाएंगे, जिनमें साड़ियां, सूट, कुर्तियां, और अन्य परिधान शामिल हैं।

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बाजार (सांकेतिक फोटो)

लखनऊ : नवाबों की नगरी लखनऊ खानपान के साथ मेहमान नवाजी के लिए तो फेमस है ही, लेकिन यहां की बाजार भी अपने आपमें खास हैं। इसी तरह की हजरतगंज क्षेत्र में स्थित लव लेन एक प्रसिद्ध मार्केट है। यहां कपड़ों और जूतों की विस्तृत वैरायटी सस्ती कीमतों पर उपलब्ध है। लव लेन में कपड़े अन्य बाजारों की तुलना में बहुत सस्ते मिलते हैं। दिनभर यहां भीड़ लगी रहती है, लोग दूर-दूर से खरीदारी करने आते हैं। यहां बच्चों, बड़े और महिलाओं के कपड़े आसानी से मिल जाते हैं।

शॉपिंग करने आई अर्चना ने बताया कि वह मटियारी से आई हैं। उन्होंने अपने बच्चों के लिए चार हजार रुपए में कपड़े खरीदे, जो अन्य बाजारों में आठ से दस हजार रुपए में मिलते। इससे उन्हें पैसे की बचत हुई, जिसे वह अन्य कामों में लगा सकेंगी।

सस्ती दर पर मिलते हैं कपड़े

लव लेन, लखनऊ के हजरतगंज क्षेत्र में स्थित एक प्रसिद्ध मार्केट है, जहां कपड़े और जूते सस्ती कीमतों पर उपलब्ध हैं। यहां दूर दराज से लोग खरीदारी करने पहुंचते हैं। लव लेन में कपड़ों की वैरायटी इतनी है कि एक दिन में सब कुछ देख पाना मुश्किल है। यह मार्केट लखनऊ ही नहीं आसपास के जिले को लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है, और यहां हमेशा भीड़ रहती है। यह मार्केट अपनी सस्ती कीमतों और अच्छी क्वालिटी के कपड़ों के लिए जानी जाती है। यहां आपको विभिन्न प्रकार के कपड़े मिल जाएंगे, जिनमें साड़ियां, सूट, कुर्तियां, और अन्य परिधान शामिल हैं। यह मार्केट हजरतगंज के लीला सिनेमा हॉल के पास स्थित है, जिससे यहाँ पहुंचना आसान हो जाता है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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