कानपुर

Kanpur News: सस्ती दवा और फ्री में ई रिक्शा की सवारी, कहीं आप भी इस झांसे में पड़कर जान खतरे में तो नहीं डाल रहे

Kanpur News: कानपुर के एलएलआर अस्पताल के बाद जीएसवीएसएस पीजीआई अस्पताल के बाहर निजी मेडिकल स्टोर के एजेंटों द्वारा मरीजों को सस्ती दवा के नाम पर ठगा जा रहा है। मरीजों को अस्पताल के मुख्य द्वार से ई-रिक्शा की मुफ्त सेवा के नाम पर निजी मेडिकल स्टोर पर छोड़ा जाता है।

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सस्ती दवा के नाम पर निजी मेडिकल स्टोर एजेंट कर रहे ठगी

Photo : iStock

Kanpur News: दिन प्रतिदिन ठगी के मामले बढ़ते जा रहे हैं। लोगों को ठगने के लिए रोज नए तरीके निकाले जा रहे हैं। ठगी के मामले इस प्रकार बढ़ने लगे हैं कि स्वास्थ्य व्यवस्था भी इससे बची नहीं है। ऐसे ही ठगी के कुछ मामले कानपुर के जीएसवीएसएस पीजीआई के बाहर से सामने आए हैं। पीजीआई अस्पताल के बाहर आपको कई ई-रिक्शा खड़े दिख जाएंगे, जो सस्ते में दवा और मुफ्त सेवा के नाम पर आपको ठग रहे हैं। पीजीआई की फार्मेसी में अस्पताल की अधिकतम दवा मिल जाती है। लेकिन उसके बाद भी निजी मेडिकल स्टोर के एजेंटों द्वारा सस्ती दवाओं का झांसा देकर यहां के मरीजों को ठगा जा रहा है।

एलएलआर के बाद पीजीआई के बाहर शुरू हुआ ठगी का खेल

एलएलआर और उर्सला अस्पताल के मुख्य द्वार पर चल रहा ठगी का ये खेल अब जीएसवीएसएस पीजीआई के बाहर तक पहुंच गया है। यहां सस्ती दवाई का झांसा देकर निजी मेडिकल स्टोर तक पहुंचाने वाले एजेंटों ने ई-रिक्शा खड़े किए हुए हैं। जो मरीज को अस्पताल के मुख्य द्वार से बिठाकर मेडिकल स्टोर तक ले जाते हैं। मरीज को अस्पताल से निकलता देख ई-रिक्शा वाले उन्हें तुरंत सस्ती दवा और फ्री में ई-रिक्शा की सवारी करने का झांसा देते हैं। ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं।

ऐसा ही एक घटना कल्याणपुर की सीता देवी के साथ भी हुई। वह न्यूरो सर्जरी की ओपीडी में दिखाने आई थी। उन्हें मुख्य द्वार से बाहर निकलता देख मेडिकल स्टोर के एजेंट ने बरगलाना शरू कर दिया और सस्ती दवा का झांसा देकर ई-रिक्शा में बिठाकर मेडिकल स्टोर छोड़ आया। उसके बाद दूसरे मरीज को लेने वापस अस्पताल पहुंच गया। एक अन्य मामले में जीएसवीएसएस पीजीआई से बाहर निकल रहे एक बुजुर्ग के हाथ में पर्चा देख ई-रिक्शा बिन बुलाए उनके पास आ गए और उनका हाथ पकड़ रिक्शा में बिठाकर मेडिकल स्टोर छोड़ आया।

मेडिकल स्टोर एजेंटों को मिलता है कमीशन

बताया जा रहा है कि निजी स्टोर के इन एजेंटों को इसके बदले में मन मुताबिक कमीशन मिलता है, जिसके लिए वह लोगों को बरगलाकर उन्हें मेडिकल स्टोर छोड़ आते हैं और दूसरे मरीजों की तलाश में रहते हैं। लगातार बढ़ती ठगी के इस नए तरीके से लोगों को परेशानियां हो रही है। सस्ती दवाओं के नाम पर उन्हें लूटा जा रहा है।

नोडल ऑफिसर ने क्या कहा

इस मामले की जानकारी मिलते ही नोडल ऑफिसर डॉ. मनीष सिंह ने कहा कि अस्पताल परिसर के बाहर इस तरह की घटनाओं की जानकारी मिली है। इस पर रोक लगनी चाहिए। उन्होंने कहा सस्ती दवाओं के नाम पर दूर-दराज इलाकों से आए मरीजों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। निजी मेडिकल स्टोर के इन एजेंटों को हटाने को लेकर जल्द से जल्द कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उन डॉक्टरों को भी चिन्हित किया जाएगा, जो मरीजों को बाहर की दवाएं लिख रहे हैं। उनकी एक रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

Varsha Kushwaha
वर्षा कुशवाहाauthor

वर्षा कुशवाहा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की एजुकेशन डेस्क पर बतौर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं और पिछले 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा पूरा करने के बाद उन्होंने न्यूज रूम में तेजी, सटीकता और गहराई के साथ काम करते हुए अपनी मजबूत संपादकीय पहचान बनाई है। वर्षा की विशेषज्ञता हाइपर-लोकल खबरों, इवेंट कवरेज और स्टेट पॉलिटिक्स से जुड़ी रिपोर्टिंग में भी है। अब तक वर्षा कुशवाहा 8,000 से अधिक खबरें लिख चुकी हैं, जिनमें कई अहम लोकल रिपोर्ट्स, एजुकेशन और करियर की खबरें तथा फीचर-आधारित स्टोरीज शामिल हैं।

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