कानपुर

कानपुर देहात : आस्था किसी धर्म की कैद में नहीं! इन महिलाओं ने भोलेनाथ के सामने झुकाया सिर; लोग बोले...

कानपुर देहात के रसूलाबाद कस्बे में स्थित प्राचीन श्री धर्मगढ़ बाबा मंदिर में दो मुस्लिम धर्म से ताल्लुक रखने वाली महिलाएं मंदिर के मुख्य द्वार पर सिर झुकाकर माथा टेक रही हैं। उनके साथ एक छोटा बच्चा भी है, जो भोलेनाथ की प्रतिमा के सामने हाथ जोड़कर खड़ा है।

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बाबा शिव (सांकेतिक फोट, इमेज क्रेडिट ISTOCk)

कानपुर देहात : उत्तर प्रदेश से एक वीडियो ने भारत की साझा संस्कृति की खूबसूरती को उजागर किया है, जिसमें दो मुस्लिम महिलाएं एक शिव मंदिर में पूजा करती नजर आ रही हैं। यह वीडियो कानपुर देहात के रसूलाबाद कस्बे के प्राचीन श्री धर्मगढ़ बाबा मंदिर का है। वीडियो में महिलाएं मंदिर के मुख्य द्वार पर सिर झुकाकर माथा टेकती हैं और नंदी महाराज के चरणों को स्पर्श करती हैं, जबकि उनके साथ एक छोटा बच्चा भी है, जो भगवान शिव की प्रतिमा के सामने हाथ जोड़कर खड़ा है।

दानपात्र में पैसे भी किए अर्पित

पूजा के बाद, महिलाएं मंदिर के दानपात्र में पैसे भी अर्पित करती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ये महिलाएं रसूलाबाद क्षेत्र की निवासी हैं और पहले भी मंदिरों में देखी जा चुकी हैं। इस घटना को एक श्रद्धालु ने रिकॉर्ड किया और सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया। लोग इसे भारत की 'गंगा-जमुनी तहजीब' और व्यक्तिगत आस्था की स्वतंत्रता का प्रतीक मान रहे हैं।

मंदिर के पुजारियों और श्रद्धालुओं ने भी इस घटना पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है, यह कहते हुए कि ईश्वर में आस्था किसी धर्म की सीमा में नहीं बंधी होती। सोशल मीडिया पर इस वीडियो की तारीफों की बौछार हो रही है, और इसे सांप्रदायिक सद्भाव और आपसी प्रेम का प्रतीक माना जा रहा है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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