कानपुर : कानपुर में पिछले दिनों नाबालिग लड़की के अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म मामले में अबतक आरोपी दारोगा को गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। पीड़िता के बयान और पहचान पुख्ता करने के बावजूद यूपी पुलिस का रवैया बेहद असंवेदनशील बना हुआ है। ऐसे में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने उत्तर प्रदेश पुलिस के प्रमुख (DGP) राजीव कृष्ण को नोटिस जारी किया है।
एनएचआरसी ने एक बयान में कहा कि खबरों के मुताबिक, आरोपियों में से एक उत्तर प्रदेश पुलिस का उप निरीक्षक है। कहा है कि उसने पांच जनवरी को 14 वर्षीय लड़की के अपहरण और उससे दुष्कर्म की घटना से संबंधित मीडिया पर खबर का स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग ने पाया है कि अगर खबर में निहित तथ्य सत्य हैं, तो इससे मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मुद्दा उठता है। अतः आयोग ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
क्या था मामला
कक्षा सात की पढ़ाई बीच में छोड़ने वाली छात्रा को 5 जनवरी की रात करीब 10 बजे अगवा कर एक कार से रेलवे पटरी के पास एक सुनसान जगह पर ले जाया गया, जहां उसके साथ करीब दो घंटे तक कथित तौर पर यौन उत्पीड़न किया गया और फिर उसे बेहोश हालत में उसके घर के बाहर छोड़ दिया गया। आरोपियों में एक स्थानीय पत्रकार यूट्यूबर शिवबरन यादव और बिठूर थाना में तैनात एसआई अमित कुमार मौर्य शामिल था। मामले में फरार आरोपी एसआई अमित कुमार मौर्य की गिरफ्तारी में मददगार सूचना देने वाले को 50,000 रुपये का नकद इनाम देने की घोषणा की गई है। जिस गाड़ी में लड़की के साथ रेप की वारदात को अंजाम दिया गया वो एसयूवी मौर्या के नाम पर पंजीकृत है, जब्त कर ली गई है। पुलिस जांच में पता चला कि बिठूर पुलिस थाने में तैनात होने के बावजूद मौर्य घटना के समय सचेंडी में मौजूद था। पीड़िता के परिवार ने पुलिस पर मामले को दबाने का आरोप लगाया ।
इन अधिकारियों पर एक्शन
सचेंडी इलाके में 14 वर्षीय लड़की के कथित अपहरण और सामूहिक बलात्कार के मामले में दो और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की भी गई। पनकी के सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) शिखर को रिजर्व पुलिस लाइंस से संबद्ध कर दिया है और भीमसेन पुलिस चौकी प्रभारी दिनेश कुमार को लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया है। इससे पहले कथित लापरवाही और तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने के आरोप में पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) दिनेश त्रिपाठी को हटाया गया था और सचेंडी थाना के प्रभारी निरीक्षक (एसएचओ) विक्रम सिंह को निलंबित किया गया था।
पीड़िता का बयान मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज किया गया। अधिकारी ने बताया कि इससे एक दिन पहले, अदालत ने पुलिस को फटकार लगाई थी क्योंकि पीड़िता के नाबालिग होने के बावजूद यौन अपराधों से बाल संरक्षण अधिनियम (पाक्सो) के प्रावधानों को लागू नहीं किया था। उन्होंने बताया कि प्राथमिकी में बाद में अधिनियम की संबंधित धाराओं को शामिल करने के लिए संशोधन किया गया।
