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Bengaluru: उपनगरीय रेलवे प्रोजक्ट के लिए के-राइड और केंद्र में क्यों फंसा है पेंच? समुद्री सुरंग का काम तेज

बेंगलुरु उपनगरीय रेलवे परियोजना को पूरा करने के लिए के-राइड को तकनीकी क्षमता बढ़ाने की जरूरत है। रेल मंत्री वैष्णव ने कहा राज्य सरकार को केंद्र का सहयोग करना होगा, ताकि तय समय सीमा पर रेलवे प्रोजेक्ट पूरे हो सकें।

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बेंगलुरु उपनगरीय रेलवे प्रोजक्ट

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

बेंगलुरु: रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रविवार को कहा कि कर्नाटक रेल बुनियादी ढांचा विकास कंपनी (के-राइड) लिमिटेड को बेंगलुरु उपनगरीय रेलवे परियोजना (बीएसआरपी) को पूरा करने के लिए अपनी तकनीकी क्षमता बढ़ाने की जरूरत है। मंत्री ने कहा कि वह कुछ हफ्तों के बाद बेंगलुरु का दौरा कर बेंगलुरु उपनगरीय रेलवे परियोजना की समीक्षा करेंगे। वैष्णव ने कहा कि पिछली बार जब मैंने परियोजना की समीक्षा की तो प्रमुख मुद्दा के-राइड की तकनीकी क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता थी क्योंकि यह (बीएसआरपी) एक बहुत ही जटिल परियोजना है। इसलिए कर्नाटक रेल बुनियादी ढांचा विकास कंपनी (के-राइड) को एक संगठन के रूप में अपनी तकनीकी क्षमता बढ़ाने की जरूरत है। हमने पिछली बार इसी की समीक्षा की थी।

राज्य सरकार की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी

वैष्णव ने समयसीमा के बारे में कहा कि परियोजना में राज्य सरकार की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी है और इसलिए केंद्र को यह सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार के साथ काम करना होगा कि सब कुछ ठीक रहे। उन्होंने कहा कि यह एकतरफा (परियोजना) नहीं है। यह राज्य और केंद्र का संयुक्त उद्यम है और राज्य की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

समुद्री सुरंग का काम शुरू

मंत्री ने कहा कि पिछली बार जब बेंगलुरु में थे तो उन्होंने राज्य सरकार से तकनीकी क्षमता बढ़ाने का अनुरोध किया था। मुंबई से अहमदाबाद तक बुलेट ट्रेन परियोजना के बारे में वैष्णव ने कहा कि अच्छी प्रगति हुई है। वैष्णव ने कहा कि 327 किलोमीटर का ‘वायाडक्ट’ पहले ही पूरा हो चुका है और यह व्यावहारिक रूप से बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। समुद्र के नीचे सुरंग का काम भी शुरू हो गया है। पहला खंड 2026 में शुरू हो जाना चाहिए।

(इनपुट-भाषा)

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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