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सुसाइड या मर्डर? जामनगर तालाब में मिले दो नाबालिग बच्चों के शव; रात से लापता थे दोनों

जामनगर के रणमल तालाब में गुरुवार सुबह दो नाबालिग बच्चों के शव मिले। दोनों बच्चे रात से लापता थे। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अभी मौत की वजह स्पष्ट नहीं हुई है।

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जामनगर में दो बच्चों के शव तालाब से मिले

Jamnagar News: गुजरात के जामनगर जिले से एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां तालाब से जो नाबालिग बच्चों के शव बरामद हुए हैं। जिनकी उम्र 12 से 15 साल के बीच बताई जा रही है। परिवार के अनुसार दोनों बच्चे बीती रात से लापता थे। जिसके बाद आज सुबह उनकी लाश रणमल तालाबा के पीछे मिली। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है मौत की वजह आत्महत्या है या हत्या। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

पुलिस को नहीं मिली गुमशुदगदी की रिपॉर्ट

पुलिस के अनुसार, मृतक बच्चों की पहचान 12 से 15 साल के जेनिश नंदा और हर्षिल डांगर के तौर पर हुई है। परिवार ने बताया कि दोनों बच्चे बुधवार रात को घर से निकले थे, लेकिन देर रात तक घर वापस नहीं पहुंचे। जिसके बाद परिजनों ने अपने स्तर पर बच्चों की काफी तलाश शुरू की। लेकिन सुबह तक उनका कुछ पता नहीं चल सका। इस बीच उन्होंने पुलिस के पास कोई गुमशुदगी की रिपॉर्ट दर्ज नहीं कराई थी।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से सुलझेगी गुत्थी!

जानकारी के अनुसार, गुरुवार सुबह रणमल तालाब के पास स्थानीय लोगों ने दो शव देखे, जिसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। जिसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने इस मामले में एक्सीडेंटल डेथ (Accidental Death) का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल यह खुलासा नहीं हुआ है कि दोनों बच्चों की मौत आत्महत्या है या इसके पीछे कोई साजिश है।

इस मामले में एक अहम सवाल यह भी उठ रहा है कि जिस तालाब में बच्चों के शव बरामद हुए हैं, वह तैरने के योग्य नहीं माना जाता। ऐसे में यह संभावना कम लगती है कि दोनों बच्चे वहां तैरने के लिए गए हों। इस कारण पुलिस इस घटना को गंभीरता से लेते हुए हर एंगल से मामले की जांच कर रही है।

Dhruv Sanchania
ध्रुव संचानियाauthor

ध्रुव संचानिया गुजरात में टाइम्स नेटवर्क के सीनियर जर्नलिस्ट और ब्यूरो चीफ के पद पर कार्यरत हैं। ध्रुव ने प्रिंट, रेडियो, डिजिटल और टीवी पर शानदार काम किया है। क्राइम, इन्वेस्टिगेशन से लेकर इंसानी कहानियों तक में उनका काम गहराई से भरा होता है। जब वह हेडलाइन के पीछे नहीं भाग रहे होते तो वह सड़कों, सिनेमा और अगली छिपी हुई कहानी के पीछे भाग रहे होते हैं। उनका काम ऐसा है जो उन्हें अलग ला खड़ा करता है।

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