जयपुर

Rajasthan: बड़े कुल की रस्म निभाई, ख्वाजा का 811वां उर्स संपन्न, जायरीनों ने मांगी अमन चैन की दुआ

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Feb 2, 2023, 01:15 AM IST

Rajasthan : अजमेर में स्थित सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती का 811वां उर्स बड़े कुल की रस्म के साथ बुधवार को संपन्न हो गया। दरगाह शरीफ में बड़े कुल की रस्म के मौके पर मुस्लिम अकीदतमंदों ने केवड़े और गुलाब जल से दरगाह की दीवारों को धोया। जायरीनों ने मुल्क और आवाम के अमनो आब के लिए गरीब नवाज के दर पर हाथ उठाकर दुआ मांगी। उर्स के दौरान दरगाह शरीफ में करीब 2000 लीटर से ज्यादा गुलाब जल की खपत होती है।

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राजस्थान के अजमेर में ख्वाजा का 811वां उर्स बड़े कुल की रस्म के साथ संपन्न (सांकेतिक तस्वीर)

Photo : Twitter
KEY HIGHLIGHTS
  • मुस्लिम अकीदतमंदों ने गुलाब जल से दरगाह की दीवारों को धोया
  • 9 रजब की तारीख को दरगाह में बड़े कुल की रस्म निभाई
  • दरगाह शरीफ में जायरीनों ने मुल्क में अमनो आब की दुआ मांगी


Rajasthan : राजस्थान के अजमेर में स्थित सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती का 811वां उर्स बड़े कुल की रस्म के साथ बुधवर को संपन्न हो गया। दरगाह शरीफ में बड़े कुल की रस्म के मौके पर मुस्लिम अकीदतमंदों ने केवड़े और गुलाब जल से दरगाह की दीवारों को धोया। इसके बाद पूरा दरगाह परिसर गुलाब की महक से भर गया।

वहीं जायरीनों ने दरगाह में हाजिरी लगाकर खुद व परिवार की सलामती और खैरियत सहित खुशहाली की दुआ मांगी। वहीं जायरीनों की ओर से मुल्क और आवाम के अमनो आब के लिए गरीब नवाज के दर पर हाथ उठाकर दुआएं मांगी गई। खादिम सैयद जहूर चिश्ती के मुताबिक कुल की रस्म उर्स की आखरी रस्म होती है। इसके बाद उर्स समाप्त हो जाता है एवं जायरीन अपने घरों को लौटने लगते हैं।

दो हजार लीटर गुलाब जल होता खर्च

दरगाह में खादिमों की संस्था अंजुमन कमेटी के पूर्व सचिव वाहिद अंगाराशाह के मुताबिक कुल की रस्म के तहत दरगाह के खादिम आस्ताने में इत्र और गुलाब जल से मजार शरीफ को गुसल दी जाती है। इसके बाद परिसर का गुलाब जल और केवड़े से धोया जाता हैं। इसके अलावा सूफीयत से जुड़े लोग आस्ताने के बाहर के इलाके को केवड़े और गुलाब जल से धोते हैं। उर्स के दौरान दरगाह शरीफ में करीब 1500 से 2000 लीटर से ज्यादा गुलाब जल और केवड़े की खपत होती है।

परपंरागत तरीके से निभाई बड़े कुल की रस्म

ख्वाजा गरीब नवाज के सालाना उर्स पर कई परंपरागत रस्मे निभाने के बाद सबसे आखिर में बड़े कुल की रस्म होती हैं। इसके दरगाह दरगाह शरीफ में आम दिनों के जैसी व्यवस्थाएं बहाल हो जाती है। बुधवार को दरगाह में बड़े कुल की रस्म के लिए बड़ी संख्या में जायरीन मौजूद रहे। बताया जाता है कि, ख्वाजा गरीब नवाज के उर्स का समापन विधिवत रूप से रजब की 6 तारीख को छोटे कुल की रस्म के साथ हो जाता है। इसके बाद 9 रजब की तारीख को दरगाह में बड़े कुल की रस्म होती है। इस रवायत को गुसल की रस्म भी कहा जाता है। जायरीन अपने साथ दरगाह की दीवार पर लगने वाले गुलाब जल और केवड़े के पानी को बोतलों में भरकर लाते हैं। बता दें कि, 9 रजब को मजार शरीफ को आखरी गुसल दिया जाता हैं। अब अगला गुसल मजार शरीफ को रजब के चांद की पहले तारीख को अगले साल दिया जाएगा।

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