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राजस्थान में बनेंगे 19 नए जिले, चुनाव से ठीक पहले सीएम अशोक गहलोत की बड़ी घोषणा

  • Written by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 17, 2023, 07:19 PM IST

राजस्थान में नए जिले बनाने की मांग काफी समय से हो रही थी। शुक्रवार को सीएम गहलोत में विधानसभा में नए जिलों के गठन का ऐलान किया।

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सीएम अशोक गहलोत ने घोषणा की कि राजस्थान में 19 नए जिले बनेंगे।

Photo : PTI

Rajasthan News: राजस्थान में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बड़ी घोषणा की है। उन्होंने राज्य में 19 नए जिले बनाने का ऐलान किया है। बता दें, राजस्थान में पहले 33 जिले थे, लेकिन इस घोषणा के बाद अब जिलों की संख्या बढ़कर 52 हो जाएगी।

विधानसभा में यह घोषणा करते हुए सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि हमें लंबे समय से राज्य में कुछ नए जिलों के गठन की मांग मिल रही थीं। इन प्रस्तावों की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था और हमें अंतिम रिपोर्ट मिल गई है। उन्होंने कहा, रिपोर्ट के बाद राज्य में नए जिलों के गठन का फैसला किया गया है।इस फैसले के बाद राजस्थान में 52 जिले और 10 संभाग हो जाएंगे।

ये होंगे 19 नए जिले

सीएम गहलोत ने जिन 19 नए जिलों के बनाने की घोषणा की है, उसमें अनूपगढ़, बालोतरा, ब्यावर, डीग, दूदू, जयपुर उत्तर, जयपुर दक्षिण, जोधपुर पूर्व, जोधपुर पश्चिम, गंगापुर सिटी, केकड़ी, कोटपुतली, खैरतल, बहरोड़, नीमकाथाना, सांचोर, फलोदी, सलुंबर, शाहपुरा शामिल हैं। सरकार इन जिलों को विकार दो हजार करोड़ रुपये से करेेेेगी।

बदल सकते हैं चुनावी समीकरण

राजस्थान में नए जिलों की घोषणा को कांग्रेस सरकार के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है, नए जिलों के गठन के बाद कई विधानसभा क्षेत्रों के चुनावी समीकरणों में बदलाव देखने को मिलेगा। बता दें, राजस्थान में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले कांग्रेस और भाजपा अपनी-अपनी तैयारी में जुट गई हैं। कांग्रेस के लिए यह राज्य प्रतिष्ठा का भी सवाल बन गया है।

AIMIM की भी हो सकती है एंट्री

राजस्थान में सीधी लड़ाई भाजपा और कांग्रेस की बीच मानी जा रही है। हालांकि, अन्य पार्टियों की एंट्री से यहां चुनावी जंग काफी रोचक होती दिख रही है। खबरों की मानें तो राजस्थान के विधानसभा चुनाव में AIMIM भी हाथ आजमा सकती है, पार्टी यहां तीस से चालीस सीटों पर चुनाव लड़ सकती है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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