Navbharat Navnirman Manch: डिजिटल शिक्षा के जरिए ग्रामीण राजस्थान काफी सक्षम और सशक्त हुआ है। छात्रों के विकास के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में क्या कुछ बदलाव हुए हैं, इसके लिए अशोक गहलोत की सरकार ने पिछले 5 वर्षों में क्या कुछ किया? टाइम्स नाउ नवभारत के समिट 'नवभारत नवनिर्माण मंच' पर खास चर्चा हुई। चित्तौड़गढ़ के जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) प्रमोद दशोरा ने बताया कि राजस्थान में मिशन 2030 के तहत डिजिटल शिक्षा के विकास पर ध्यान केंद्रित रहेगा। इससे जुड़ी सरकार की योजनाओं और कदमों के बारे में उन्होंने जानकारी साझा की।
डिजिटल एजुकेशन के क्षेत्र में और आगे बढ़ेंगे बच्चे
चित्तौड़गढ़ के जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) प्रमोद दशोरा ने बताया कि राजस्थान में सबसे बड़ा चैलेंज कोविड काल में देखने को मिला। कोई कहीं नहीं जा पाता था, बच्चे घरों में थे। हम इसी चैलेंज के तहत मिशन 2030 तक पहुंचेंगे। ज्ञान की गहराई में जाने के लिए डिजिटल एजुकेशन हमारा एक सहारा बन गया है। सरकार ने लगभग 304 स्कूलों में डिजिटल इंटेलेक्चुअल बोर्ड स्थापित हो रहे हैं। आने वाले समय में राजस्थान के बच्चे डिजिटल एजुकेशन के क्षेत्र में और आगे बढ़ेंगे।
ग्रामीण राजस्थान में कैसे पहुंचती है डिजिटल शिक्षा?
ग्रामीण राजस्थान में कैसे डिजिटल एजुकेशन पहुंचाई जाती है? इसके जवाब में प्रमोद दशोरा हमने सभी स्कूलों के लिए 4 टीबी की हार्डड्राइव मुहैया कराने की योजना बनाई। 10 हजार लेसन्स उसपर अपलोड कर दिया गया। स्कूलों ने इसके लिए कार्य शुरू किया। एक हजार स्कूलों के लिए सरकार ने 4 टीबी की हार्डड्राइव खरीदा है। जब इन हार्डड्राइव में लेसन्स अपलोड किए गए तो बच्चे अपने घर पर भी लेसन्स को देख सकेगा।
डिजिटल एजुकेशन के लिए बच्चों को कैसे करें जागरूक?
बच्चे डिजिटल एजुकेशन से बोर हो जाते हैं, लेकिन आने वाले समय में जो नए एजुकेशन पॉलिसी आ रही हैं, उनमें बच्चों के फिजिकल एक्टिविटी पर भी मूल्यांकन किया जाएगा। ऐसे में इससे काफी बदलाव आएंगे। विद्यालयों में हमें खेल सुविधाओं को बढ़ाना पड़ेगा। हम छोटे-छोटे स्कूलों में ओपन जिम लगा रहे हैं, जिसके जरिए बच्चों का शारीरिक और मानसिक दोनों ही विकास किया जा सके। मिशन 2030 के हिसाब से हमने प्लान बनाया है कि राजस्थान में ऐसा विद्यालय को जहां हर तरह की सुविधाएं हो, जिसमें स्विमिंग पुल हो, लैब हो, खेलने की सुविधाएं हो, आवासीय विद्यालय हो। जो हमारे पास चैलेंज हैं, वो निश्चित तौर पर दूर हो जाएंगे। हमारे देश के बच्चे कम्प्यूटर ज्ञान के साथ-साथ शारीरिक क्षमताओं का भी विकास होगा।
