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Barabanki: भेड़िए के बाद सियार का तांडव, तीन लोगों का कर दिया खून-खच्चर; फिर जो हुआ...

बहराइच में भेड़ियों के आतंक के बाद बाराबंकी में सियार ने तीन लोगों पर अटैक कर दिया, जिससे तीन लोग बुरी तरह घायल हो गए हैं। हालांकि, ग्रामीणों ने घेरकर उसे मार डाला।

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सियार (प्रतिकात्मक फोटो)

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

बाराबंकी: जिले के थाना मोहम्मदपुर खाला चौकी लालपुर करौता स्थित ग्राम कुतलूपुर में एक सियार के हमले में तीन ग्रामीण घायल हो गए इसके बाद घेराबंदी कर ग्रामीणों ने उसे मार डाला। ग्रामीणों ने बताया की ग्राम कुतलूपुर निवासी पप्पू के घर पर बुधवार शाम एक सियार ने पप्पू, जितेंद्र की पुत्री मीनू और इसी गांव के राम लखन पर हमला कर दिया। तीनों घायलों को एक निजी अस्पताल में ले जाया गया। घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीणों ने सियार को चारों ओर से घेर लिया। बुधवार शाम को लोगों ने उसे पीट-पीट कर मार डाला। देर रात सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके की ओर रवाना हुई।

इस घटना से दो दिन पूर्व थाना जैदपुर हरख ब्लॉक के ग्राम गोछौरा के पास बकरी चराने के लिए निकली 10 वर्षीय रिजवाना पर सियार ने हमला कर उसे घायल कर दिया था। कुछ घंटे बाद ही एक और गांव में जंगली जानवर ने 45 वर्षीय महादेव पर हमला कर दिया था। वन विभाग की टीमों ने कॉम्बिंग शुरु कर दी है।

वन क्षेत्राधिकारी हरख प्रदीप सिंह ने बताया कि पगचिह्न से हमलावर सियार लग रहा है। मोहम्मदपुर खाला के थाना प्रभारी अनिल कुमार सिंह ने बताया कि लालपुर करौता पुलिस चौकी सामने स्थित कुतलूपर गांव में बुधवार देर शाम हुई घटना के बाद मौके पर पुलिस पहुंची। तीनों घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, सभी की हालत खतरे से बाहर है। पुलिस गांव में मौजूद है। वन दरोगा भागहर झील रेंज मोहित श्रीवास्तव ने बताया पग चिन्हों के अनुसार सियार की पुष्टि हुई है।

(इनपुट-भाषा)

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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