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2 राज्य, 37 नए रेलवे स्टेशन, बिछने वाली है 339 KM लंबी नई रेल लाइन; किसानों की हो जाएगी चांदी!

Itarsi-Nagpur Fourth Railway Line: मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच कनेक्टिविटी को और गति देने के लिए इटारसी-नागपुर चौथी रेल लाइन को बिछाने की मंजूरी दे दी गई है। 297 किलोमीटर लंबी इस परियोजना के विकास के लिए 5,451 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह रेल लाइन इधर, महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंगों को आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम ज्योतिर्लिंग और तमिलनाडु स्थित रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग को आपस में कनेक्ट करेगी। इसके अलावा 3 अन्य रेल लाइनों को भी मंजरी दी गई है। आइये जानते हैं इस रूट पर कितने स्टेशन होंगे?

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इटारसी-नागपुर चौथी रेल लाइन (फोटो-Istock)

Itarsi-Nagpur Fourth Railway Line: भारतीय रेल यात्रियों की सुविधाओं का ख्याल रखते हुए हाईस्पीड ट्रेनों की संख्या में इजाफा करने के साथ नए ट्रैक के निर्माण पर भी जोर दे रही है। विभिन्न राज्यों में कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए नई रेल लाइनें बिछाने का कार्य चल रहा है। इसी बीच सरकार ने मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच रेल कनेक्टिविटी को बूस्ट देने के लिए नागपुर-इटारसी चौथी रेल लाइन प्रोजेक्ट को मंज़ूरी दी है। इस परियोजना के पूरी होने से दोनों राज्यों के बीच सफर करने वाले यात्रियों को बड़ी सहूलियत होगी। 297 किलोमीटर लंबे रूट पर 339 ट्रैक किलोमीटर लंबी रेल लाइन बिछाई जाएगी। इस प्रोजेक्ट को डेवलप करने के लिए 5,451 करोड़ रुपये की लागत खर्च की जाएगी। इस नए ट्रैक के निर्माण के बाद नई हाईस्पीड ट्रेनों की संख्या में बढ़ोतरी की जाएगी, जिससे लोगों को सहूलियत होगी। आइये जानते हैं इस रूट पर कितने स्टेशन होंगे?

इटारसी-नागपुर चौथी रेल लाइन (फोटो-Istock)

इटारसी-नागपुर चौथी रेल लाइन (फोटो-Istock)

नागपुर और इटारसी के बीच चौथी रेल लाइन परियोजना को मंज़ूरी मिलने से दोनों राज्यों के बीच कनेक्टिविटी तेज होगी। यह चौथी रेल लाइन प्रोजेक्ट दिल्ली-चेन्नई हाई डेंसिटी नेटवर्क का पार्ट है। 297 रूट किलोमीटर लंबी रेल लाइन पर कुल 37 रेलवे स्टेशन होंगे। साथ ही रूट को विकसित करने के लिए 36 बड़े पुल, 415 छोटे पुल और 2 फ्लाईओवर और 74 अंडरपास के साथ 4 सुरंगें निर्मित की जाएंगी।

जानकारी विवरण
रेल लाइन प्रोजेक्ट का नामनागपुर-इटारसी चौथी रेल लाइन
नागपुर-इटारसी चौथी रेल लाइन की लंबाई297 किमी.
नागपुर-इटारसी चौथी रेल लाइन की लागत 5451 करोड़ रुपये
नागपुर-इटारसी चौथी रेल लाइन में स्टेशनों की संख्या37
नागपुर-इटारसी चौथी रेल ट्रैक की लंबाई 339 किमी.

नागपुर-इटारसी चौथी रेल लाइन महाराष्ट्र के नागपुर जिले और मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम, बैतूल और पंढुर्ना जिलों को सीधा लाभ पहुंचाएगी। इस मार्ग के विकास से मुंबई-हावड़ा नेटवर्क के साथ नागपुर में जुडने से यात्री और माल ढुलाई काफी तेज़ होगी। जानकारी के मुताबिक,10 मिलियन टन अतिरिक्त माल के ट्रांसपोर्टेशन की सुविधा होगी और रसद लागत में 1206 करोड़ रुपये की बचत करेगी।

इतने ज्योतिर्लिं सीधे होंगे कनेक्ट

नागपुर-इटारसी चौथी रेल लाइन परियोजना से मध्य प्रदेश में महाकालेश्वर (Mahakaleshwar) और ओंकारेश्वर (Omkareshwar), आंध्र प्रदेश में श्रीशैलम (Srisailam) और तमिलनाडु में रामेश्वरम (Rameswaram Jyotirlinga Temples) जैसे 4 ज्योतिर्लिंग मंदिरों को कनेक्टिविटी प्रदान करने से न केवल बड़ी संख्या में भक्तों को लाभ होगा, बल्कि इन स्थानों में पर्यटन उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, इससे नियमित यात्रियों, छात्रों, व्यापारियों आदि को भी काफी लाभ होगा।

इटारसी-नागपुर चौथी रेल लाइन (फोटो-Istock)

इटारसी-नागपुर चौथी रेल लाइन (फोटो-Istock)

चार नई रेल परियोजनों की मंजूरी

नागपुर-इटारसी चौथी रेल लाइन, रेल मंत्रालय की चार परियोजनाओं, नागपुर-इटारसी चौथी लाइन, औरंगाबाद-परभणी दोहरीकरण (Aurangabad-Parbhani Railway Line Doubling), अलुआबारी रोड-न्यू जलपाईगुड़ी (Aluabari Road-New Jalpaiguri Railway Line) तीसरी और चौथी लाइन तथा डांगोआपोसी-जरोली (Dangoaposi-Jaroli Third Tailway Line) तीसरी और चौथी लाइन को कैबिनेट द्वारा दी गई मंजूरी का हिस्सा है, जिनकी कुल लागत लगभग 11,169 करोड़ रुपये है।

नागपुर-इटारसी चौथी रेल लाइन से कितना लाभ

नई रेल लाइन बिछने से किसानों से सर्किल रेट पर जमीन अधिग्रहण की जाएगी, जिससे अन्नदाताओं को बड़ा आर्थिक लाभ होगा। इन सभी मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट से लगभग 43 लाख से अधिक आबादी वाले 2300 से अधिक गावों को सीधा लाभ मिलेगा। हालांकि, इस रूट पर स्टेशनों के नाम क्या होंगे, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है, लेकिन नए स्टेशनों के बनने से स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार उपलब्ध होगा।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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