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दिल्ली पुलिस ने किया इंटरनेशनल SIMBOX सिंडिकेट का पर्दाफाश, 100 करोड़ से ज्यादा की ठगी का हुआ खुलासा

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की IFSO यूनिट ने “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर चल रहे एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी रैकेट का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह हाई-टेक सिम बॉक्स तकनीक के जरिए विदेशी कॉल को भारतीय नंबर बताकर लोगों को आतंकी मामलों और राष्ट्रीय सुरक्षा का डर दिखाता था। जांच में इस नेटवर्क के तार चीन, ताइवान, पाकिस्तान, नेपाल और कंबोडिया तक जुड़े पाए गए हैं।

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दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Delhi News: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की IFSO यूनिट ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर लोगों को भयभीत कर करोड़ों रुपये की ठगी कर रहा था। जांच में इस नेटवर्क के तार चीन, ताइवान, पाकिस्तान, नेपाल और कंबोडिया से जुड़े पाए गए हैं। ठग पीड़ितों को दिल्ली ब्लास्ट, पहलगाम आतंकी हमला, आतंकी फंडिंग और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर मामलों में नाम आने का डर दिखाकर मानसिक दबाव बनाते थे, ताकि लोग घबराकर उनकी जालसाजी का शिकार हो जाएं।

गिरोह के सदस्य खुद को यूपी एटीएस का अधिकारी बताकर कॉल करते थे और कहते थे कि पीड़ित का नाम दिल्ली ब्लास्ट या पहलगाम आतंकी हमले जैसे मामलों में सामने आया है और उसे आतंकियों से जुड़े होने के आरोप में तुरंत गिरफ्तार किया जा रहा है। इसके बाद पीड़ितों को तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” में रखकर उनसे तत्काल पैसे ट्रांसफर करवाए जाते थे। इस पूरी ठगी को अंजाम देने के लिए जालसाज हाई-टेक सिम बॉक्स तकनीक का इस्तेमाल कर रहे थे, जिसके जरिए विदेशी कॉल को भारतीय लोकल कॉल के रूप में दिखाया जाता था, ताकि लोगों को शक न हो और पुलिस की निगरानी से भी बचा जा सके।

गिरोह कैसे करता था सिम बॉक्स तकनीक का इस्तेमाल?

जांच के दौरान खुलासा हुआ कि यह गिरोह सिम बॉक्स तकनीक का इस्तेमाल कर विदेशी कॉल को भारतीय नंबर के रूप में प्रदर्शित करता था। कॉल को जानबूझकर 2जी नेटवर्क के जरिए रूट किया जाता था, जिससे कॉल की वास्तविक लोकेशन का पता लगाना बेहद कठिन हो जाता था। इसके साथ ही आईएमईआई नंबरों को बदलने या घुमाने की तकनीक अपनाकर ट्रैकिंग सिस्टम को भी गुमराह किया जा रहा था। पुलिस ने करीब एक महीने तक नेटवर्क की गतिविधियों और मूवमेंट पर निगरानी रखने के बाद दिल्ली के गॉयला डेयरी, कुतुब विहार, दीनपुर और शाहाबाद डेयरी सहित कई इलाकों में सिम बॉक्स के ठिकानों का पर्दाफाश किया। आगे की जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क दिल्ली तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका फैलाव मोहाली (पंजाब), मुंबई के मालाड क्षेत्र और कोयंबटूर (तमिलनाडु) तक था। इस मामले में अब तक सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और जांच आगे भी जारी है।

गिरफ्तार आरोपी और उनका रोल

पुलिस जांच में अब तक कई आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया गया है, जिनकी भूमिका अलग-अलग स्तर पर सामने आई है। दिल्ली निवासी 53 वर्षीय शशि प्रसाद पर सिम बॉक्स सेटअप की भौतिक जिम्मेदारी संभालने का आरोप है, जो किराए पर ली गई जगह से मशीनों का संचालन करवा रहा था। वहीं 38 वर्षीय परविंदर सिंह, जो दिल्ली का ही रहने वाला है, पूरे सेटअप के संचालन और रखरखाव का जिम्मा संभालते हुए नेटवर्क को लगातार सक्रिय बनाए रखता था।

वहीं, ताइवान का नागरिक 30 वर्षीय आई-त्सुंग चेन इस पूरे नेटवर्क का तकनीकी मास्टरमाइंड बताया जा रहा है, जो सिम बॉक्स डिवाइस की सप्लाई, कॉन्फिगरेशन और टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म के जरिए ऑपरेशन को नियंत्रित करता था; उसे 21 दिसंबर 2025 को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया। मोहाली निवासी 33 वर्षीय सरबदीप सिंह, जिसके पास तकनीकी पृष्ठभूमि है, मोहाली में सिम बॉक्स मॉड्यूल के संचालन में शामिल पाया गया। इसी तरह 28 वर्षीय जसप्रीत कौर, जो पहले कंबोडिया के स्कैम सेंटर में रह चुकी है, भारत में नेटवर्क चलाने में सहयोग कर रही थी। कोयंबटूर के रहने वाले दिनेश के पर क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े लेनदेन में सक्रिय रहने और विदेश यात्राओं के जरिए फंडिंग व क्रिप्टो चैनलों से जुड़े होने का संदेह है। इसके अलावा मुंबई के 33 वर्षीय अब्दुस सलाम पर मालाड इलाके में सिम बॉक्स सेटअप संचालित करने का आरोप है।

चीन, पाकिस्तान और नेपाल का कनेक्शन

जांच में यह सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क में चीन, पाकिस्तान और नेपाल की कड़ियां अलग-अलग भूमिकाओं के जरिए आपस में जुड़ी हुई थीं। कंबोडिया को स्कैम कॉल सेंटर, प्रशिक्षण और भर्ती के मुख्य अड्डे के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। चीन और ताइवान से सिम बॉक्स से जुड़ा हार्डवेयर, चाइना मोबाइल की विदेशी सिम और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही थी। पाकिस्तान की भूमिका फंडिंग, आईएमईआई मास्किंग या ओवरराइटिंग जैसी उन्नत तकनीकों और संचालन से जुड़े निर्देश देने में बताई गई है, जिसमें पाकिस्तानी हैंडलर सक्रिय थे। वहीं नेपाल को वर्तमान समय में एक तरह के “ऑपरेशनल कमांड सेंटर” की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था, जहां से पूरे नेटवर्क को निर्देश भेजे जा रहे थे। पुलिस के अनुसार यह मामला केवल वित्तीय ठगी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े पहलू राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर चिंता का विषय हैं।

क्या-क्या हुआ बरामद?

पुलिस की अब तक की जांच में बड़े पैमाने पर सामग्री बरामद की गई है। कार्रवाई के दौरान 22 सिम बॉक्स, कई मोबाइल फोन, लैपटॉप, सीसीटीवी कैमरे और राउटर जब्त किए गए हैं। इसके अलावा पासपोर्ट और कंबोडिया से जुड़े रोजगार कार्ड भी मिले हैं। पुलिस ने चीन मोबाइल की लगभग 120 विदेशी सिम सहित बड़ी संख्या में अन्य सिम कार्ड भी बरामद किए हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि इस नेटवर्क का संबंध देशभर में दर्ज हजारों शिकायतों से है और इसके जरिए 100 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी को अंजाम दिया गया है। मामले की गहन जांच जारी है तथा अन्य आरोपियों और विदेशी हैंडलर्स की तलाश की जा रही है।

Anuj Mishra
अनुज मिश्राauthor

अनुज मिश्रा भारत के अग्रणी क्राइम और इन्वेस्टिगेटिव पत्रकारों में से एक हैं। वह वर्तमान में टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। पिछले करीब दो दशकों से अनुज मिश्रा ने अपराध, आंतरिक सुरक्षा और संगठित अपराध से जुड़े मामलों की गहन रिपोर्टिंग और संपादकीय नेतृत्व किया है। उन्होंने सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग, एनआईए और खुफिया एजेंसियों से संबंधित बड़ी और संवेदनशील खबरों को नज़दीकी से कवर किया है। अनुज मिश्रा की सबसे बड़ी ताक़त उनकी ग्राउंड रिपोर्टिंग है। हर बड़ी और अहम खबर में वह ग्राउंड ज़ीरो पर मौजूद रहकर घटनाओं की प्रत्यक्ष कवरेज करते रहे हैं। यही कारण है कि उनकी रिपोर्टिंग में जमीनी सच्चाई और तथ्य हमेशा साफ़ झलकते हैं। टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ने से पहले अनुज मिश्रा देश के कई बड़े टेलीविज़न न्यूज़ चैनलों के साथ काम कर चुके हैं, जहां उन्होंने अपनी पत्रकारिता और एडिटोरियल स्किल्स से अलग पहचान बनाई। अनुज ने न केवल देश-विदेश की बड़ी खबरों को जनता तक पहुँचाया है, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति और सत्ता गलियारों से जुड़े घटनाक्रमों पर भी पैनी नज़र रखी है। उनकी पत्रकारिता शैली तथ्यपरक, इन्वेस्टिगेटिव और जमीनी हकीकत पर आधारित मानी जाती है। उन्होंने आतंकवाद, संगठित अपराध, ड्रग्स सिंडिकेट, हाई-प्रोफाइल जांच और सियासी घटनाक्रमों पर कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स की हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है।

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