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कश्मीर में आएगी रफ्तार की बहार, कटरा-बनिहाल खंड में दौड़ेंगी ट्रेनें; 110 KM स्पीड से वादियों में मौज से होगा सफर

कटरा-बनिहाल खंड पर तेज रफ्तार ट्रेन के सफल परीक्षण ने रेल इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया। कश्मीर और देश के बाकी हिस्सों के बीच सीधी रेल सेवाओं की जल्द शुरुआत के लिहाज से एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

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कटरा-बनिहाल खंड का ट्रायल सफल

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

बनिहाल: जम्मू-कश्मीर में कटरा से बनिहाल तक भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण 'चढ़ाई वाले ट्रैक' पर तेज रफ्तार ट्रेन के सफल परीक्षण के साथ भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया। उत्तरी सर्किल के रेलवे सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) दिनेश चंद देशवाल ने बुधवार को यह बात कही। देशवाल की इस टिप्पणी को कश्मीर और देश के बाकी हिस्सों के बीच सीधी रेल सेवाओं की जल्द शुरुआत के लिहाज से एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वे आज दो-दिवसीय वैधानिक निरीक्षण पूरा होने के बाद जुटाए गए डेटा का विश्लेषण करेंगे, जिसके बाद ही केंद्र इस बहुप्रतीक्षित रेल सेवा को शुरू करने के बारे में कोई फैसला लेगा। कटरा रेलवे स्टेशन से रवाना तेज गति ट्रेन के सफलतापूर्वक बनिहाल पहुंचने के बाद देशवाल ने कहा कि उनकी टीम कटरा लौटेगी और कश्मीर के लिए सीधी ट्रेन सेवा शुरू करने के संबंध में कोई निर्णय लेने से पहले एकत्रित समस्त डेटा का विश्लेषण किया जाएगा।

110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन का परीक्षण

उन्होंने बताया कि कटरा से बनिहाल तक भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में 180 डिग्री के कोण पर चढ़ते ट्रैक पर 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन के सफल परीक्षण ने रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा है। परीक्षण सुचारू रहा। हम इससे पूरी तरह से संतुष्ट हैं। इसका श्रेय हमारे इंजीनियरों को जाता है, जिन्होंने इतना शानदार काम किया है।

सीआरएस के मुताबिक, परीक्षण ट्रेन सुबह 10.30 बजे कटरा स्टेशन से रवाना हुई और डेढ़ घंटे में बनिहाल स्टेशन पहुंची। उन्होंने बताया कि ट्रेन ने दोपहर दो बजे कटरा के लिए वापसी की यात्रा शुरू की और 3.30 बजे अपने गंतव्य स्थान पर पहुंची। सीआरएस के अनुसार, यह इस ट्रैक पर अंतिम परीक्षण है। नवनिर्मित रेलवे लाइन के दो-दिवसीय वैधानिक निरीक्षण के लिए कटरा पहुंचे देशवाल ने कहा कि कश्मीर और देश के बाकी हिस्सों के बीच रेल सेवाएं शुरू करने पर अंतिम फैसला केंद्र सरकार लेगी। इस बारे में (रेल सेवाओं की शुरुआत) बात करने की स्थिति में नहीं हूं। वैधानिक निरीक्षण आज शाम तक पूरा हो जाएगा और सभी एकत्रित डेटा का उत्तर रेलवे के दिशा-निर्देशों के अनुसार विश्लेषण किया जाएगा।

इंजीनियरों ने तकनीकी का मनाया लोहा

सीआरएस के मुताबिक, कटरा-बनिहाल खंड पर अब तक का परीक्षण और निरीक्षण संतोषजनक रहा है। उन्होंने कहा कि हमारा बुनियादी ढांचा उत्कृष्ट है और बहुत जल्द हमारी रिपोर्ट के आधार पर एक निष्पक्ष निर्णय लिया जाएगा। कटरा लौटकर देशवाल ने बताया कि बनिहाल से कटरा की तरफ 'ढलान वाले ट्रैक' पर भी तेज रफ्तार ट्रेन का परीक्षण सफल रहा। यह (परीक्षण) दोनों तरफ से पूरी तरह सफल रहा... ट्रेन टी-30 (सुरंग-30) से भी 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गुजरी। इस सुरंग ने निर्माण प्रक्रिया के दौरान कुछ चुनौतियां पेश कीं, लेकिन इंजीनियरों ने तकनीकी समस्याओं का समाधान किया और ट्रैक को इस गति से परिचालन के लिए बिल्कुल उपयुक्त बना दिया।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पिछले महीने रियासी-कटरा खंड के पूरा होने की घोषणा की थी, जिसे लगभग तीन दशकों के काम के बाद कश्मीर को रेल मार्ग से देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा गया था। चार जनवरी को कटरा-बनिहाल खंड पर इलेक्ट्रिक ट्रेन का सफल परीक्षण किया गया था। रेलवे ने पिछले महीने इस मार्ग के विभिन्न खंडों पर छह परीक्षण किए हैं, जिनमें दो प्रमुख पड़ाव अंजी खड्ड और चिनाब पुल भी शामिल हैं।

कुल 272 किलोमीटर लंबी उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक (यूएसबीआरएल) परियोजना में से 209 किलोमीटर मार्ग पर विभिन्न चरणों में रेल परीक्षण किया गया है। अधिकारियों ने कहा कि कश्मीर को रेल मार्ग से देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने की महत्वाकांक्षी परियोजना 1997 में शुरू की गई थी, लेकिन भूवैज्ञानिक, स्थलाकृतिक और मौसम संबंधी चुनौतियों के कारण इसमें कई बाधाएं आईं।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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