उत्तराखंड के चमोली में स्थित सिखों के पवित्र धाम श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा के कपाट खुलने से पहले तैयारियां तेज हो गई हैं। भारतीय सेना की 418 इंडिपेंडेंट फील्ड कंपनी (9 माउंटेन ब्रिगेड) की टीम गुरुद्वारा मैनेजमेंट ट्रस्ट के सेवादारों के साथ मिलकर सफलतापूर्वक गुरुद्वारा परिसर तक पहुंच गई है। अब टीम वहीं रहकर अपनी सेवाएं देगी।
अब हेमकुंड साहिब में रहकर ही सेना कर सकेगी काम
टीम ने हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा पहुंचकर पहले अरदास की और फिर परिसर के द्वार खोल दिए गए। जिसके बाद अब सेना और सेवादारों की टीम को रोजाना घंगरिया वापस नहीं जाना पडे़गा। पहले उन्हें हर दिन काम पूरा होने के बाद नीचे लौटना पड़ता था, जिससे काम की गति प्रभावित हो रही थी। लेकिन अब वे हेमकुंड साहिब में ही रुककर यात्रा मार्ग और परिसर से संबंधित कार्यों को तेजी से पूरा कर सकेंगे।
हेमकुंड साहिब यात्रा के ट्रैक सुधार का काम
टीम अब हेमकुंड साहिब से अटलकोटी ग्लेशियर प्वाइंट तक ट्रैक को चौड़ा करने का काम करेगी, ताकि श्रद्धालुओं को यात्रा के लिए सुरक्षित और सुगम मार्ग मिल सके। भारतीय सेना हर साल कठिन हिमालयी परिस्थितियों में इस सेवा कार्य को अंजाम देती है, जिससे यात्रा हेमकुंड साहिब यात्रा सुचारु रूप से संचालित हो सके।
कब खुलेंगे हेमकुंड साहिब के कपाट
करीब 4,632 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हेमकुंड साहिब गुरुद्वाराबर्फ से ढके पहाड़ों और पवित्र झील से घिरा हुआ है। हर साल यहां यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। इस साल श्री हेमकुंड साहिब के कपाट 23 मई 2026 शनिवार को सभी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। तीर्थयात्रियों का पहला जत्था तीन दिन पहले 20 मई को ऋषिकेश से रवाना हो जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए यात्रा को सुरक्षित और सुचारु बनाने के लिए प्रशासन और संबंधित एजेंसियां भी पूरी तरह से अलर्ट मोड में हैं।
