Haryana Rajya Sabha Election 2026 : हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव बेहद दिलचस्प हो गया है। हरियाणा में राज्यसभा की 2 सीटें खाली हुई थी। विधायकों की संख्या बल के अनुसार एक-एक सीट बीजेपी और कांग्रेस को जाना तय थी, लेकिन एक निर्दलीय उम्मीदवार ने नामांकन दाखिल करके इस चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। निर्दलीय उम्मीदवार के मैदान में उतरने से कांग्रेस की धड़कनें भी बढ़ गई हैं। क्योंकि इससे पहले 2 बार हरियाणा में दो राज्यसभा के चुनाव इस बात के गवाह है कि कांग्रेस जीती हुई सीट निर्दलीय उम्मीदवार से हार चुकी है।
बीजेपी-कांग्रेस के पास पर्याप्त वोट
5 मार्च को राज्यसभा की दो सीटों के लिए नामांकन का अंतिम दिन था। सबसे पहले बीजेपी के उम्मीदवार संजय भाटिया ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और बीजेपी के तमाम विधायकों के साथ अपना नामांकन भरा। इसके बाद कांग्रेस के उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध ने नामांकन दाखिल किया। हरियाणा में राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए एक उम्मीदवार को 31 विधायकों के वोट की जरूरत है। राज्य में विधानसभा की 90 सीटें हैं, जिनमें से 48 बीजेपी के विधायक हैं और बीजेपी को 3 निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन प्राप्त है, 37 कांग्रेस के विधायक हैं और दो विधायक इंडियन नेशनल लोक दल के हैं। इन आंकड़ों के हिसाब से कांग्रेस और बीजेपी के पास अपने-अपने उम्मीदवार को जीतने के लिए पर्याप्त विधायक हैं।
निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल की एंट्री
लेकिन निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर सतीश नांदल की एंट्री ने अब इस चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। क्योंकि अगर निर्दलीय उम्मीदवार नामांकन पत्र दाखिल नहीं करता तो दोनों पार्टियों को उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया जाता। अब निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर आ जाने से वोटिंग होना तय है। लेकिन निर्दलीय उम्मीदवार ने कांग्रेस की चिंताएं बढ़ा दी हैं। क्योंकि सतीश नांदल को बीजेपी का समर्थन हासिल है। सतीश नंदलाल भाजपा नेता हैं। 2019 में भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ रोहतक की गढ़ी सांपला किलोई सीट से चुनाव भी लड़ चुके हैं।
सूत्रों के अनुसार सतीश नांदल को बीजेपी के 17 उम्मीदवारों का समर्थन मिल सकता है क्योंकि अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए बीजेपी को 31 विधायकों की ही जरूरत है। इसके अलावा तीन निर्दलीय और दो इंडियन नेशनल लोकदल के विधायकों का समर्थन भी मिल सकता है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें चुनाव जीतने के लिए 9 और विधायकों का वोट हासिल करना पड़ेगा। तभी वो 31 के आंकड़े पर पहुंचेंगे और ये 9 विधायक कांग्रेस से ही उनको तोड़ने होंगे। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अंदर खाने सतीश नांदल ने कांग्रेस के कुछ विधायक तोड़ लिए हैं या फिर यह कांग्रेस को भ्रम में डालने के लिए ही वो चुनाव लड़ रहे हैं।
2016 में कैसा था समीकरण
इससे पहले जून 2016 में दो सीटों पर हुए चुनाव में एक सीट बीजेपी के बीरेंद्र चौधरी जीते थे और दूसरी सीट पर भी बीजेपी समर्थित व्यवसाई सुभाष चंद्रा आजाद प्रत्याशी के तौर पर चुनाव जीत गए थे। कांग्रेस और इंडियन नेशनल लोक दल ने RK आनंद को समर्थन दिया था और दोनों के पास कुल 35 विधायक थे। मगर उस वक्त भी 14 कांग्रेस विधायकों के वोट अवैध करार हुए थे, जबकि एक INLD विधायक ने भी सुभाष चंद्रा के पक्ष में वोट किया था।
जून 2022 में भी दो राज्यसभा सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी अजय माकन को हार का सामना करना पड़ा था। कांग्रेस के पास उस वक्त भी 31 विधायक थे मगर बावजूद इसके बीजेपी और जेजेपी समर्थित आजाद उम्मीदवार कार्तिकेय शर्मा ने माकन को हराकर दूसरी राज्यसभा सीट भी जीत ली थी। एक सीट पर बीजेपी के कृष्ण लाल पंवार जीत थे।
