ग्रेटर नोएडा में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत का मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर गंभीर रूप ले चुका है। इस हादसे को लेकर दादरी से विधायक तेजपाल नागर ने राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी लिखकर इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताया है। इसके साथ ही विधायक ने दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग भी की है।
विधायक तेजपाल नागर ने अपनी चिट्ठी में बताया कि ग्रेटर नोएडा निवासी सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की 16 जनवरी 2026 को एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। युवराज की कार एक निर्माणाधीन साइट पर भरे पानी में गिर गई, जिससे वह बाहर नहीं निकल सके और उनकी जान चली गई। विधायक के अनुसार यह हादसा कोई सामान्य दुर्घटना नहीं, बल्कि नोएडा प्राधिकरण, आपदा प्रबंधन विभाग और अग्निशमन विभाग की तरफ से घोर लापरवाही का नतीजा है।
तेजपाल नागर ने अपनी चिट्ठी में कहा कि जिस इलाके में यह हादसा हुआ, वहां लंबे समय से गहरे गड्ढे, भारी जलभराव और खराब स्ट्रीट लाइट की समस्या बनी हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इन खामियों को लेकर वे पहले भी दो बार संबंधित विभागों को चिट्ठी लिखकर चेतावनी दे चुके थे, इसके बावजूद किसी वरिष्ठ अधिकारी ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इसी का नतीजा है कि एक होनहार युवक को अपनी जान गंवानी पड़ी।

दादरी विधायक तेजपाल नागर की सीएम के नाम चिट्ठी
विधायक ने हादसे के बाद किए गए रेस्क्यू ऑपरेशन पर भी सवालिया निशान खड़े किए हैं। उन्होंने अपनी चिट्ठी में उल्लेख किया कि मौके पर मौजूद एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF) और अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। समय पर और प्रभावी बचाव कार्य नहीं होने के चलते युवराज की जान नहीं बचाई जा सकी, जिससे उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
तेजपाल नागर ने सीएम योगी आदित्यनाथ के सामने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग रखी है। साथ ही उन्होंने नोएडा प्राधिकरण, अग्निशमन विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह किया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को होने से रोका जा सके।
इसके अलावा विधायक ने तेजी से विकसित हो रहे नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे शहरों में बढ़ती आबादी और दुर्घटनाओं को देखते हुए एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की स्थायी इकाई स्थापित करने की मांग भी रखी है, जिससे आपात स्थितियों में समय पर राहत और बचाव कार्य सुनिश्चित किया जा सके।
