दरअसल, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के इंजीनियरों का कहना है कि नियो मेट्रो में मेट्रो की तुलना में 40 से 45 प्रतिशत कम लागत आएगी। जीडीए और अन्य स्थानीय सरकारी एजेंसियों के पास पर्याप्त फंड नहीं है। ऐसे में मेट्रो का विकल्प तलाशा गया है। नियो मेट्रो इसमें सटीक बैठ रहा है।
नियो मेट्रो प्रोजेक्ट पर 416 करोड़ खर्च का अनुमान
आपको बता दें कि नियो मेट्रो को हम आधुनिक ट्राम बोल सकते हैं। यह पटरियों की जगह बिजली के ओवरहेड तोरों के माध्यम से सड़क पर चलती है। यह करीब 25 मीटर लंबी होती है, जिसमें एक समय में दो सौ से ज्यादा यात्री बैठ सकते हैं। इसके संचालन की लगात भी मेट्रो ट्रेन और रोपवे से काफी कम है। जीडीए के इंजीनियरों के मुताबिक वैशाली से मोहन नगर तक 517 किलोमीटर लंबे रोप-वे निर्माण कराने पर 450 करोड़ रुपए का खर्च आ जाएगा। वहीं, इस रूट पर नियो मेट्रो के संचालन पर 416 करोड़ रुपए की लागत आने की संभावना है। एमएमआरसी की शुरुआती रिपोर्ट मिलने के बाद लागत से जुड़ी राशि की स्थिति और स्पष्ट हो जानी है।
डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट पर शुरू होगा काम
जीडीए के मुख्य अभियंता राकेश कुमार गुप्ता का कहना है कि नियो मेट्रो के लिए एमएमआरसी को स्थल दिखाया जा चुका है। उनकी रिपोर्ट आने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जानी है। पहली प्राथमिकता रूट वैशाली से मोहन नगर है। दूसरा रूट नोएड सेक्टर 62 से साहिबाबाद रैपिड रेल स्टेशन प्रोजेक्ट तक होगा। एमएमआरसी की शुरुआती रिपोर्ट में लागत एवं प्रोजेक्ट से जुडी अन्य जानकारियां मिलने के बाद डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट पर काम शुरू किया जाना है। मुख्य अभियंता के मुताबिक अगले दो महीने के अंदर यह सभी काम पूरे कर लिए जाएंगे। इसके बाद डिजाइन एवं अन्य कागजी कार्यवाही शुरू कर दी जाएगी।
