Ghaziabad News: यूपी के गाजियाबाद में एक शख्स लापता बेटा बनकर एक परिवार के साथ रह रहा था। परिवार को ठगने के आरोप में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि इस प्रकार इस शख्स ने एक या दो परिवारों को नहीं बल्कि 9 परिवारों को चूना लगाया है। आरोपी दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और राजस्थान के कुल नौ परिवारों में उनका लापता बेटा बनकर रहा और ठगी की वारदात को अंजाम दिया। आरोपी ने इस दौरान कई परिवारों में चोरी की और अन्य फर्जी गतिविधियों में शामिल रहा। पुलिस ने आरोपी को गाजियाबाद से गिरफ्तार किया है।
लापता बेटा बनकर देता रहा लोगों को धोखा
गाजियाबाद पुलिस ने बताया कि आरोपी गाजियाबाद और देहरादून के दो परिवारों के साथ लापता हुआ बेटा बनकर रहने और उन्हें ठगने के आरोप में गिरफ्तार किए गए व्यक्ति ने पूछताछ में कई खुलासे किए हैं। पुलिस ने बताया कि उसे ऐसे और दो परिवार मिले हैं, जिन्हें व्यक्ति ने ठगा था। डीसीपी (ट्रांस हिंडन) निमिश पाटिल ने कहा, शख्स इन वर्षों में नौ परिवारों के साथ रहा और कहानी बनाकर खुद को उनका खोया हुआ बेटा बताया करता था। पुलिस ने उन चार परिवारों की पहचान की है, जिन्हें आरोपी ने ठगी का शिकार बनाया। अन्य पांच परिवारों का पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
गाजियाबाद में ठगी को अंजाम देते हुए पकड़ा गया आरोपी
लापता बेटा बनकर ठगी की घटना 24 नवंबर 2024 को सामने आई, जब राजू नाम के एक व्यक्ति ने गाजियाबाद में खोड़ा पुलिस थाना से संपर्क कर दावा किया कि 30 साल पहले उसका अपहरण कर लिया गया था और उसे राजस्थान के जैसलमेर में बंधक बनाकर रखा गया। आरोपी ने पुलिस को बताया था कि वह किसी तरह बच निकला और एक ट्रक में यात्रा करके दिल्ली पहुंचा। आरोपी के अनुसार, पहचान का सत्यापन करने के लिए पुलिस ने सोशल मीडिया, अखबारों और अन्य माध्यमों से उसकी फोटो जारी की। इस दौरान, गाजियाबाद के शहीद नगर के निवासी तुलाराम ने आरोपी को अपने खोये हुए बेटे भीम सिंह उर्फ पन्नू के रूप में पहचाना, जिसके बाद खोड़ा पुलिस ने व्यक्ति को तुलाराम को सौंप दिया।
कुछ दिन बाद ही तुलाराम को आरोपी के व्यवहार पर शक हुआ। क्योंकि उसका व्यवहार उसके खोये हुए बेटे जैसा नहीं था। 27 नवंबर को तुलाराम ने साहिबाबाद पुलिस से संपर्क किया और बताया कि जो व्यक्ति पिछले पांच दिन से उसके परिवार के साथ रह रहा है, वह उसका बेटा नहीं हो सकता। पुलिस ने बताया था कि गहन पूछताछ के दौरान वह अपनी पुरानी कहानी दोहराता रहा, लेकिन अंततः उसने सच्चाई बयां कर दी और अपनी सही पहचान राजस्थान के जैतसर के निवासी इंद्रराज के रूप में बताई।
फर्जीवाड़ा करके घर में चोरी करता था आरोपी
इंद्रराज ने बताया कि वह कम उम्र से ही मामूली चोरी के मामलों में शामिल था जिसकी वजह से 2005 में उसके घरवालों ने उसे घर से निकाल दिया। उसने विभिन्न नामों से इस तरह का फर्जीवाड़ा करके घरों से चोरी की और देहरादून, दिल्ली और राजस्थान में विभिन्न स्थानों पर फर्जी गतिविधियों में शामिल रहा। आरोपी खुद को खोया हुआ बेटा बताकर कई परिवारों के साथ रहा और ठगी को अंजाम दिया। इंद्रराज दिल्ली आने से चार महीने पहले देहरादून में आशा शर्मा नामक महिला का बेटा बनकर उनके घर रहा था। वह देश के विभिन्न हिस्सों में पंकज कुमार और राम प्रताप नाम से भी रहा है।
(इनपुट - भाषा)
