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भागलपुर में छठ पर अनहोनी, गंगा में डूब गए 4 बच्चे; परिजनों के सामने चली गई जान

बिहार के भागलपुर में छठ के मौके पर गंगा स्नान करने गए चार बच्चों की डूबकर मौत हो गई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घटना पर शोक व्यक्त करते हुए प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना जताई है।

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(सांकेतिक फोटो-Istock)

भागलपुर : जिले में सोमवार सुबह गंगा नदी में नहाने गए चार बच्चों की डूबने से मौत हो गई। पुलिस ने यह जानकारी दी। नवगछिया की पुलिस अधीक्षक (एसपी) प्रेरणा कुमार ने बताया कि यह घटना इस्माइलपुर थाना क्षेत्र के नवतोलिया में हुई। बच्चे अपने परिजनों के साथ घाट पर आए थे। नहाते समय अचानक वे गहरे पानी में चले गए। गोताखोरों ने उन्हें बाहर निकाला।

एसपी ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। बच्चों को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सभी मृतक बच्चों की आयु 10 से 15 वर्ष के बीच है। इस बीच, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घटना पर शोक व्यक्त करते हुए प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना जताई है।

बिहार में छठ का तीसरा दिन

आपको बता दें कि बिहार में चार दिवसीय अनुष्ठान के तीसरे दिन सोमवार की शाम छठ व्रतधारी अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। इसे लेकर पटना सहित राज्य के सभी क्षेत्रों में तैयारियां पूरी होने की बात कही गई है। महापर्व छठ को लेकर बिहार के शहरों से लेकर कस्बों, गांवों तक के लोग सूर्योपासना में श्रद्धाभक्ति में डूबे हुए हैं। ‎ ‎

व्रतियों को छठ घाट जाने में किसी तरह की परेशानी न हो, इसे लेकर मोहल्ले की गलियों से लेकर पक्की सड़कों पर युवा और बच्चे झाड़ू लगा रहे हैं और उस पर पानी का छिड़काव कर रहे हैं। ‎ ‎पटना जिले में गंगा नदी एवं उसकी सहायक नदियों के लगभग 550 घाटों को छठव्रतियों के लिए तैयार किया गया है। इसके अलावा पार्क एवं तालाबों में भी छठ किए जा रहे हैं। ‎

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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