दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का 6, फ्लैगस्टाफ रोड स्थित आधिकारिक आवास, जिसे भाजपा ने 'शीशमहल' नाम दिया था, अब पूरी तरह नए स्वरूप में नजर आएगा। दिल्ली सरकार ने इस परिसर को स्टेट गेस्ट हाउस और आधुनिक सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि राजधानी में अब तक अपना समर्पित स्टेट गेस्ट हाउस नहीं था, इसलिए यह कदम लंबे समय से महसूस की जा रही जरूरत को पूरा करेगा।
दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश वर्मा ने बताया कि परिसर में 'रंग महल' विकसित किया जाएगा। यहां देश-विदेश से आने वाले सरकारी प्रतिनिधिमंडलों, विशिष्ट अतिथियों (VVIP) और अन्य उच्चस्तरीय मेहमानों के ठहरने की व्यवस्था होगी। इसके अलावा सरकारी बैठकों, आधिकारिक कार्यक्रमों और विभिन्न प्रशासनिक आयोजनों के लिए भी इस परिसर का इस्तेमाल किया जाएगा।
सरकार की योजना के अनुसार, यह परिसर केवल गेस्ट हाउस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे एक प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाएगा। यहां बहुउद्देशीय ऑडिटोरियम बनाया जाएगा, जहां कला प्रदर्शनियां, संगीत और नृत्य कार्यक्रम, साहित्यिक आयोजन, सांस्कृतिक उत्सव तथा अन्य सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे दिल्ली की सांस्कृतिक गतिविधियों को नया मंच मिलेगा और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजनों की मेजबानी भी आसानी से की जा सकेगी।
हालांकि इस भवन की मूल संरचना में बड़े स्तर पर बदलाव नहीं किए जाएंगे। मौजूदा ढांचे को सुरक्षित रखते हुए उसे नई जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जाएगा, ताकि निर्माण में अनावश्यक तोड़फोड़ से बचा जा सके।
सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए स्टेट गेस्ट हाउस और वीवीआईपी आवास वाले हिस्से आम लोगों के लिए बंद रहेंगे। हालांकि, कल्चरल सेंटर, ऑडिटोरियम और सार्वजनिक प्रदर्शनियों या सांस्कृतिक आयोजनों के दौरान परिसर के निर्धारित हिस्से में आम नागरिकों को प्रवेश की अनुमति होगी।
गौरतलब है कि 6, फ्लैगस्टाफ रोड स्थित यह आवास पिछले कुछ वर्षों से राजनीतिक विवादों का केंद्र रहा है। अब दिल्ली सरकार इसे सरकारी उपयोग और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए विकसित कर राजधानी को पहला समर्पित स्टेट गेस्ट हाउस देने की तैयारी कर रही है। सरकार का दावा है कि इस फैसले से एक ओर विदेशी और देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले सरकारी प्रतिनिधिमंडलों की बेहतर मेजबानी हो सकेगी, वहीं दूसरी ओर यह परिसर दिल्ली की सांस्कृतिक पहचान को भी नई मजबूती देगा।
